मुगल काल में फारसी राजभाषा थी। अकबर ने बीरबल को कविराज की उपाधि तथा नरहरि को महापात्र की उपाधि दी थी। सूरदास अकबर के दरबारी कवि थे तथा आगरा के अंधे भाट कवि के नाम से प्रसिद्ध थे। उनके पिता रामदास भी अकबर के दरबारी कवि थे । हिंदू साहित्य के मुस्लिम कवियों में रहीम खानखाना का नाम सबसे प्रसिद्ध है । वे तुलसीदास के मित्र थे । दूसरे मुसलमान हिंदी कवि रसखान थे। मधवाचार्य चंडी मंगल के लेखक एवं प्रसिद्ध बंगाली कवि थे ।1526 के बाद सबसे प्रसिद्ध मलिक मोहम्मद जायसी थे । इन्होंने पद्मावत की रचना की। कृष्ण भक्ति के मुख्य प्रवर्तक वल्लभाचार्य के आठ अनुयाई थे ,जो अष्टछाप कहलाते थे । इनमें सूरदास सर्वश्रेष्ठ थे। इन्होंने सूरसागर लिखी। चौरासी वैष्णव की वार्ता विट्ठलनाथ ने लिखी। अन्य रचनाकारों में नंद दास एवं परमानंद दास आदि प्रमुख थे। मुगल काल में चित्रकला का सबसे अधिक विकास जहांगीर के समय हुआ ।हुमायूं ने तारीख -ए-खानदान- ए -तैमूरिया के पांडुलिपि के चित्रण हेतु ईरानी चित्रकारों , यथा-मीर-सैयद अली शीराजी और ख्वाजा अब्दुस्समद तबरीज़ी की नियुक्ति की । तारीख -ए- खानदान- ए- तैमूरिया तथा बादशाहनामा चित्रकारी से संबंधित है ।अकबर के दरबार के प्रसिद्ध चित्रकारों में हैरात का बिहजाद तथा उसका शिष्य आगा मीरक थे। अकबर ने ख्वाजा अब्दुस समद को चित्रकारी विभाग का प्रमुख बनाया ।जहांगीर के समय चित्रों में सिर के पीछे आभा का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया। इस समय राजदरबार की महिलाओं , सामान्य जीवन तथा काल्पनिक चीजों के चित्र बनने लगे ।शाहजहां के समय मुग़ल चित्रकारी में सोने का ज्यादा प्रयोग होने लगा। चित्रकार बिहजात को पूर्व का राफेल तथा अब्दुस्समद को शीरी कलम या मधुलेखनी की उपाधि मिली थी। दसवंत, बसावन, केशु एवं लाल मुकुंद अकबर के समय के प्रसिद्ध चित्रकार थे।