सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलन

हिंदू सुधार आंदोलन

 ब्रह्म समाज  : हिंदू धर्म का प्रथम सुधार आंदोलन

 ब्रह्म समाज की स्थापना राजा राममोहन राय द्वारा 20 अगस्त 18 से 28 ईसवी को कोलकाता में किया गया जिसका उद्देश्य तत्कालीन हिंदू समाज में व्याप्त बुराइयों जैसे सती प्रथा बहुविवाह वेश्या गमन जातिवाद अस्पृश्यता आदि को समाप्त करना था राजा राम मोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का पिता माना जाता है इनकी प्रमुख कृतियों में 30 चैप्टर ऑफ जीसस प्रमुख है इन्होंने संवाद कौमुदी का भी संपादन किया राजा राममोहन राय ने 18 से 14 ईसवी में आत्मीय सभा की स्थापना व 18 से 15 ईसवी में इन्होंने वेदांत कॉलेज की स्थापना की कालांतर में देवेंद्र नाथ टैगोर 1818 ईस्वी से 1950 ईस्वी तक ने ब्रह्म समाज को आगे बढ़ाया बाद में केशवचंद्र सेन को ब्रह्म समाज का आज आचार्य नियुक्त किया गया हिंदू कॉलेज की स्थापना में डेविड हेयर का सहयोग था

 राजा राममोहन राय

 राजा राममोहन राय का जन्म 17 से 72 ईसवी में पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के राधा नगर गांव में हुआ था उन्नीसवीं सदी के नवजागरण आंदोलन के प्रमुख आरंभ करता प्रसिद्ध समाज सुधारक प्रख्यात शिक्षाविद् राजा राममोहन राय 1804 से 18 से 14 ईसवी तक ईस्ट इंडिया कंपनी की सेवा किए उन्होंने एकेश्वरवाद का प्रचार प्रसार किया तथा मूर्तिपूजा बहुदेववाद व कर्मकांडों का खंडन किया राजा राममोहन राय सामाजिक कुरीतियों को समाज से समाप्त करने के लिए शिक्षा अछूतों पर अत्याचार जाति प्रथा बहू विवाद सती प्रथा नारी शोषण आदि का प्रबल विरोध किया तथा 1828 ईस्वी में ब्रह्म समाज की स्थापना द्वारा उन्होंने उक्त कृतियों का उन्मूलन उनका उद्देश्य था 18 से 21 ईसवी नेपल्स क्रांति की सफलता पर स्वयं कोलकाता में एक समारोह किए थे उन्हीं के प्रयास से ही 1829 ईस्वी में सती प्रथा के उन्मूलन कानून पारित हुआ आधुनिक बंगला गद्य के जनक फारसी अंग्रेजी सहित कई भाषाओं के ज्ञाता थे सुभाष चंद्र बोस ने राजा राममोहन राय को युग दूत कहा तथा मुगल शासक अकबर सेकंड ने राजा की उपाधि दी थी

# प्रमुख संस्थान की स्थापना#

1-आत्मीय सभा (1814 से 1815)  

2-वेदांत सोसाइटी (1816)

3-हिंदू कॉलेज (1817 )

4 प्रिसेप्टस ऑफ जीसस(1820) 

5-कोलकाता यूनिट एरिया (1821 )

6-वेदांत कॉलेज( 1825)

7-ब्रह्म समाज (1828 )

#प्रमुख पत्रिकाएं - :

-संवाद कौमुदी (बंगाली भाषा )

-मिरात उल अखबार (:फारसी भाषा)

-ब्रह्म क्रानिकल( :अंग्रेजी भाषा)

 #आर्य समाज#

 आर्य समाज की स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 18 से 75 ईसवी में मुंबई में की गई बाद में मुख्यालय लाहौर स्थापित किया गया था जिसका प्रमुख उद्देश्य वैदिक धर्म को पुनः शुद्ध रूप से स्थापित करने का प्रयास भारत को धार्मिक सामाजिक व राजनीतिक रूप से एक सूत्र में बांधने का प्रयत्न पाश्चात्य प्रभाव को समाप्त करना था स्वामी दयानंद सरस्वती को बचपन में मूल शंकर के नाम से जाना जाता था इनके गुरु  स्वामी विरजानंद थे इन्होंने अपने उपदेशों में मूर्तिपूजा बहुदेववाद अवतारवाद पशु बलि श्राद्ध झूठे कर्मकांड आज की आलोचना की तथा पुनः वेदों की ओर लौटो (back to vedas)  का नारा दिया

इनके विचारों का संकलन किसकी कृति सत्यार्थ प्रकाश में मिलता है जिसकी रचना इन्होंने हिंदी भाषा में की थी सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उन्होंने छुआ-छूत व जन्म पर आधारित पर जाति प्रथा की आलोचना किए स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा चलाए गए शुद्धि आंदोलन के अंतर्गत उन लोगों को पुनः हिंदू धर्म में आने का अवसर मिला जिन्होंने किसी कारणवश कोई और धर्म स्वीकार कर लिए थे

Continue in next part........ 

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