8 अगस्त 1942 ईस्वी को मुंबई के ग्वालियर टैंक मैदान से इस आंदोलन की शुरुआत हुई इस आंदोलन को शुरू करने से पहले महात्मा गांधी ने 70 मिनट का भाषण दिया था जिसमें Do or die( करो या मरो )का नारा दिया था जिसका शाब्दिक अर्थ था देश की आजादी के लिए हर ढंग से प्रयत्न किया जाए कि इस बात का ध्यान रखें कि आंदोलन गुप्त या हिंसात्मक ना हो। महात्मा गांधी ने अपने भाषण में सभी वर्गों से अलग-अलग अपील किया जो निम्न है।
सरकारी कर्मचारी नौकरी ना छोड़े लेकिन कांग्रेस के प्रति निष्ठा की घोषणा कर दी राजा महाराजा भारतीय जनता की प्रभुसत्ता स्वीकार कर ले ।और रियासतों में रहने वाली जनता अपने को भारतीय राज्य का अंग घोषित कर दे।
छात्रों से कहा गया कि वह पढ़ाई तभी छोड़े जब आजादी प्राप्त होने तक इस पर अडिग रहें ।काश्तकारों के लिए निर्देश था कि वह जमींदार उनका साथ ना दे तो वह कर चुकता ना करें ।ऑपरेशन शून्यआवर (Zero hours)के तहत सभी कांग्रेसी नेताओं को उसी रात गिरफ्तार कर लिया गया। तथा उन्हें विभिन्न जिलों में रखा गया जीरो वर्ष 1942 में लागू किया गया था।
जयप्रकाश नारायण इस समय युवा थे जो हजारीबाग सेंट्रल जेल को तोड़ कर भाग निकले इस समय आंदोलन कब की बागडोर अच्युत पटवर्धन ,अरुणा आसफ अली,सुचेता कृपलानी ,राम मनोहर लोहिया ,बीजू पटनायक छोटा भाई इत्यादि के हाथों में रहा तथा इनके द्वारा भूमिगत होकर आंदोलन का संचालन किया गया था।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के उपरांत महिलाओं के क्रांति की प्रतीक अरुणा आसफ अली बनी।
इसी समय कांग्रेस रेडियो का गुप्त रुप से संचालन कर रहा था जिसकी नेतृत्वकर्ता उषा मेहता थी ।राम मनोहर लोहिया और बाबू भाई जी कांग्रेस रेडियो से बोलते रहते थे।
1942 में उषा मेहता और बाबू भाई को गुप्त ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया ।और उन्हें 4 वर्ष की कड़ी सजा दी गई इसी समय देखा जाए तो देश के कई स्थानों पर समानांतर सरकाारे स्थापित की गई थी।