हड़प्पा सभ्यता एक सूक्ष्म अवलोकन

 हड़प्पा का सर्वप्रथम उल्लेख 1826 ईसवी में चार्ल्स मेसन द्वारा किया गया था ।रावी नदी के बाएं तट पर स्थित है। क्षेत्रफल की दृष्टि से सिंधु सभ्यता का दूसरा सबसे बड़ा स्थल है। दुर्ग टीला को ह्वीलर ने माउंट ABनाम दिया था ।स्त्री मृण मूर्तियां अधिक मिलने से सिंधु सभ्यता का समाज मातृसत्तात्मक था ।पासा युग का प्रमुख खेल था  सैंधव सभ्यता कांस्य युगीन सभ्यता थी  तथा यहां के लोग लोहे से परिचित नहीं थे ।

मोहनजोदड़ो से मिली प्रसिद्ध नर्तकी की कांस्य प्रतिमा से यह सिद्ध होता है कि इस युग में कांस्य का प्रयोग किए जाने का पता चलता है।

चौहान दोनों में किसी दुर्ग का अस्तित्व नहीं मिला है रोपड़ में एक ऐसा कब्रिस्तान मिला है जिससे मनुष्य के साथ पालतू कुत्ता भी दफनाया गया था कालीबंगा में संधि संस्कृत की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि एक जूते हुए खेत का साक्ष्य मिले हैं।

सर्वाधिक संख्या में मुहरे मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई हैं ।जो मुख्यता चौकोर हैं। लोथल व देसलपुर से तांबे की मुहर मिली है। मोहनजोदड़ो व लोंथल से प्राप्त मुहर पर नाव का चित्र बना मिला है। हड़प्पा व चन्हूदड़ों  से तांबे कांसे की बैलगाड़ियों की आकृति प्राप्त हुई है।

चावल के प्रथम साक्ष्य लोथल से प्राप्त हुए हैं ।मोहनजोदड़ो कालीबंगा से प्राप्त कुछ मुहावरे व पशु बलि के प्रमाण मिलते हैं ।लोथल से चावल के अवशेष एवं रंगपुर से धान की भूसी प्राप्त हुई है यह दोनों स्थल वर्तमान में गुजरात में हैं ।

Posted on by