प्रथम आक्रमण
बाबर ने 1519 ईस्वी में भारत में पहला आक्रमण किया यह आक्रमण पाकिस्तान के बाजौराऔर घेरा के खिलाफ था।
इस युद्ध में बाबर ने पहली बार तोप और बंदूक का प्रयोग किया था। इस युद्ध में बाबर ने यह आदेश दिया था कि पशु पक्षी इत्यादि किसी को नुकसान ना पहुंचाया जाए।
द्वितीय आक्रमण
1519 ईस्वी में बाबर ने यूसुफजई के विरुद्ध दूसरा अभियान किया था ।इस अभियान में उसने पेशावर तक के क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया था।
तीसरा आक्रमण
बाबर का तीसरा आक्रमण 1520 ईसवी में हुआ और उसने बाजौराऔर घेरा को पुनः जीता तथा पाकिस्तान के सियालकोट तक अधिकार कर लिया था।
चौथा आक्रमण
1524 ईसवी में बाबर ने चौथा आक्रमण पंजाब के गवर्नर दौलत खान के विरुद्ध किया बाबर पंजाब लाहौर इत्यादि क्षेत्रों को जीतने के पश्चात काबुल वापस चला गया था।
पांचवा आक्रमण(सबसे महत्वपूर्ण युद्ध: पानीपत का युद्ध)
21 अप्रैल 1526 ईस्वी में पानीपत के मैदान में बाबर और इब्राहिम लोदी के सेना के बीच पानीपत का प्रथम युद्ध लड़ा गया। इस युद्ध को जीतने के पश्चात भारत में मुगल वंश की स्थापना की तथा भारत में रहने का निश्चय किया था।
खानवा का युद्ध
16 मार्च 15 से 27 ईसवी को आगरा के खानवा नामक स्थान में यह युद्ध हुआ बाबर और राणा सांगा के बीच लड़ा गया था ।और बाबर इसमें विजई हुआ था खानवा के युद्ध का प्रमुख कारण बाबर का भारत में रहने का निश्चय था राणा सांगा जानता था कि बाबर अन्य लुटेरों की भांति हिंदुस्तान को लूट कर वापस चला जाएगा। इसीलिए उसने बाबर को भारत पर आक्रमण करने तथा इब्राहिम लोदी के विरुद्ध सहायता करने का वचन दिया था। जब बाबर ने ग्वालियर और धौलपुर पर आक्रमण किया तो उसका राणा सांगा ने विरोध किया और राजपूताना का हिस्सा बताया।
चन्देरी का युद्ध
29 जनवरी 1528 ईसवी को यह युद्ध बाबर और मेदनीराय के बीच लड़ा गया। और बाबर विजई हुआ ।चंदेरी सामरिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र था। यह मालवा और बुंदेलखंड की सीमा पर स्थित था। उत्तर भारत की मुख्य सड़कें वहां से होकर गुजरती थी इसीलिए इसे जितना अति आवश्यक था यहां का शासक मेदिनी राय राणा सांगा का मित्र था तथा शक्तिशाली था।
घाघरा का युद्ध
5 मई 1529 ई को यह युद्ध बाबर और अफगानों बीच लड़ा गया था। अफगानों का नेतृत्व महमूद खां लोदी के द्वारा किया गया था। इस युद्ध में बाबर ने पहली बार भारत में नौसेना के प्रयोग किया था।इस युद्ध में बाबर विजयी हुआ था।