लोकोक्तियाँ-4

44

भागे भूत की लंगोटी ही सही

सब कुछ खोते हुये जो मिल जाए वही बहुत है

45

तीन लोक से मथुरा न्यारी

सबसे निराला होना

46

अन्धों में काना राजा

मूर्खो में थोड़ा पढ़ा लिखा

47

चला मुरारी हीरो बनने

अप्रत्याशित कार्य करना

48

नीम हकीम खतरे जान

अल्पज्ञान हानिकारक होता है

49

थोथा चना बाजे घना

अल्पज्ञानी बहुत शेखी बघारते हैं

50

अँधेर नगरी चैपट राजा

न्यायविहीन राज्य (व्यवस्था)

51

जन्म के दुखिया नाम चैन सुख

गुण के प्रतिकूल नाम

52

आधी छोड़ सारी को धावै आधी मिले न सारी पावे

जो कुछ प्राप्त है उसे सन्तोषपूर्वक ग्रहण करना चाहिए

53

काठ की हाँड़ी बार-बार नहीं चढती

धोखा बार-बार नहीं दिया जा सकता

54

कै हंसा मोती चुगै कै भूखा मर जाय

दृढ़प्रतिज्ञ व्यक्ति कभी समझौता नहीं करता

55

बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा

अप्रत्याखित सुविधा का प्राप्त होना

56

भई गति साँप छछूंदर केरी

आगे कुआँ, पिछे खाई

57

मानो तो देव नहीं तो पत्थर

संस्कार के समस्त प्रतीक भावना पर निर्भर हैं

58

रहिमन विपदा हु भली जो थोरे दिन होय

थोड़े दिन की विपत्ति भी स्वागत योग्य है (मित्र, शत्रु, उदासीन की पहचान विपत्तिकाल में होती है)

59

लिखत सुधाकर लिखिगा राहू

अच्छे कार्य का असावधानीवश या भाग्यवश विपरीत परिणाम निकलना

60

सूरज पश्चिम से निकला

असंभावित घटना

Posted on by