भारतीय मानसून ( part-3 )

ब-  बंगाल की खाड़ी की शाखा-

जून के प्रथम सप्ताह में दक्षिणी पश्चिमी मानसून की बंगाल की खाड़ी की शाखा उड़ीसा के महेंद्र गिरी पर्वत से टकराती है तथा पहाड़ी क्षेत्रों में घनघोर वर्षा करती है तथा यही मानसूनी शाखा पूर्वी घाट पर्वतमाला से टकराकर पर्वतीय क्षेत्रों में घनघोर वर्षा करती है।

गोदावरी कृष्णा नदी घाटी में यह मानसूनी हवाएं प्रवेश करती हैं तथा 150 सेंटीमीटर की वर्षा करते हुए उत्तर पश्चिम की ओर आगे बढ़ती हैं। अरब सागर के विभिन्न घाटों से होकर आने वाली हवाओं से मिलकर मलनाद की पहाड़ी पर चक्रवाती वर्षा करती हैं।

यह मानसूनी हवाएं महाराष्ट्र में नागपुर के समीप अरब सागर की हवा से मिल जाती है तथा 60 से 80 सेंटीमीटर चक्रवाती वर्षा करती हैं।

ये मानसूनी हवाएं महानदी घाटी में प्रवेश करती हैं तथा छत्तीसगढ़ में 150 सेंटीमीटर के लगभग वर्षा करती हैं। यह चक्रवाती एवं पर्वतीय वर्षा हैै। इस वर्षा के कारण ही छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है।

बंगाल की खाड़ी की एक शाखा हुगली नदी घाटी में प्रवेश करती है तथा वह दामोदर के सहारे होते हुए छोटा नागपुर पठार पर हजारीबाग पहुंचती है तथा वहां पर 100 से 150 सेंटीमीटर वर्षा करती है। इसके कारण ही छोटा नागपुर पठार में पर्याप्त वर्षा होती है और दामोदर नदी घाटी में बाढ़ आ जाती है बाढ़ लाए जाने के कारण ही दामोदर नदी को पश्चिम बंगाल का शोक कहा जाता है।

बंगाल की खाड़ी की शाखा गंगा नदी घाटी में प्रवेश करती है तथा आगे चलकर ब्रम्हपुत्र नदी घाटी में प्रवेश कर जाती है तथा यही शाखा मेघालय के गारो खासी जयंती पहाड़ियों से टकराती है और मेघालय के चेरापूंजी या मासिनराम में वर्षा करती है। भारत में सर्वाधिक वर्षा मेघालय का चेरापूंजी मासिनराम में होती है।

बंगाल की खाड़ी एक शाखा गंगा घाटी से होते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली होते हुए पंजाब चली जाती है। 

यह मानसूनी शाखा पश्चिम बंगाल में 150 से 200 सेंटीमीटर वर्षा करती है, बिहार में 100 से 150 सेंटीमीटर वर्षा, इलाहाबाद में 100 से 76 सेंटीमीटर वर्षा जबकि दिल्ली में 56 सेंटीमीटर वर्षा करती है। यह मानसूनी हवाएं 18 से 20 जून इलाहाबाद, दिल्ली में 25 जून जबकि गंगानगर (राजस्थान) में 1 से 5 जुलाई को पहुंचती है। इसी मानसूनी हवा की एक शाखा सोन नदी घाटी में प्रवेश करते हुए मध्यप्रदेश के अमरकंटक तक पहुंच जाती है तथा वहां घनघोर वर्षा करती है।

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