3- मानसून में विच्छेद-
दक्षिण पश्चिम मानसून काल में एक बार कुछ दिनों तक वर्षा होने के बाद एक, दो या कई दिनों तक वर्षा ना हो तो इसे मानसून का विच्छेद कहते हैं। यह विच्छेद निम्न कारणों से होते हैं-
A- उत्तर भारत के विशाल मैदानी क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की संख्या कम हो जाती है। जिसके कारण आई टी सी जेड में बदलाव होता है।
B- पश्चिमी तट अर्थात अरब सागर मानसून विच्छेद तब होता है जब आर्द्र पवन तट के समानांतर बहने लगती है।
C- राजस्थान में मानसून का विच्छेद तब होता है जब वायुमंडल के निम्न स्तरों पर तापमान की विलोमता या तापमान की अधिकता वर्षा करने वाली आर्द्र पवनों को ऊपर उठने से रोक देती हैं।
4- मानसून का निवर्तन-
मानसून के पीछे हटने या लौट जाने को मानसून का निवर्तन कहा जाता है। 1 सितंबर के प्रारंभ से उत्तर पश्चिम भारत में मानसून पीछे लौटना प्रारंभ कर देता है। 15 अक्टूबर को यह दक्षिणी भारत को छोड़कर शेष भाग से वापस लौट जाता है।
लौटते हुए मानसून से वर्षा तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर होती है तथा यह मानसून उत्तरी पूर्वी हवाओं से आद्रता को ग्रहण करती है।
भारत में सबसे बाद में मानसून उत्तर पश्चिम भाग अर्थात पंजाब में पहुंचता है जबकि सबसे पहले मानसून की वापसी पंजाब से ही होती है।
तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर सबसे अधिक छह माह तक मानसून सक्रिय रहता है।