भारत में मानसून के पूर्व होने वाली वर्षा-
भारत में मानसून पूर्व भी वर्षा होती है। उसे अलग-अलग क्षेत्र में अलग- अलग नाम से जाना जाता है। यह वर्षा कुल वर्षा का 10% होती हैं।
आम्र वर्षा-
ग्रीष्म ऋतु के खत्म होते होते मानसून पूर्व जो वर्षा होती हैं उसे अम्ल वर्षा कहा जाता है। यह वर्षा आम के फलों को पकने में मदद करती है।
चेरी ब्लासन शॉवर-
मानसून पूर्व होने वाली वर्षा कहवा के फूलों को खिलने में मदद प्रदान करती है। इसी कारण इसे काफी वर्षा या चेरी ब्लॉसन शॉवर कहा जाता है।
काल वैशाखी वर्षा-
असम तथा पश्चिम बंगाल में वैशाख के महीने में चलने वाली यह विनाशकारी एवं वर्षायुक्त पवन होती है। इनकी कुख्यात प्रकृति का अंदाजा इनके स्थानीय नाम काल वैशाखी से लगाया जाता है। यह वर्षा चाय, पटसन तथा चावल की फसल के लिए फायदेमंद होती है।
असम तथा पश्चिम बंगाल में वैशाख के महीने में तेज आंधी और तूफान के साथ जो तेज वर्षा होती है। उसे बारदोली छेड़ा भी कहा जाता है।
यह वर्षा चाय के फसल के लिए महत्वपूर्ण होती है। इसीलिए इसे चाय वर्षा या टी वर्षा भी कहा जाता है।