लोकोक्तियाँ-5

अशर्फी की लूट और कोपले पर छाप

मूल्यवान वस्तुओं को नष्ट करना और तुच्छ को सँजोना।

अधजल गगरी छलकत जाए

थोड़ी विद्या या बल होने पर इतराना।

अंधों के आगे रोना, अपनी दीदा खोना

निर्दयी या मूर्ख के आगे दुःखड़ा रोना बेकार होता है।

अपनी करनी पार उतरनी

किये का फल भोगना

अपना ढेंढर न देखे और दूसरों की फूली निहारे

अपना दोष न देखकर दूसरों का दोष देखना

अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग

परस्पर संगठन या मेल न रखना

आप डूबे जग डूबा

जो स्वयं बुरा होता है, दूसरों को भी बुरा समझता है।

आग लगन्ते झोंपड़ा जो निकले सो लाभ

नष्ट होती हुई वस्तुओं में से जो निकल जाये वह लाभ ही है।

आग लगाकर जमालो दूर खड़ी

झगड़ा लगाकर अलग हो जाना

आगे नाथ न पीछे पगहा

अपना कोई न होना, घर का अकेला होना

आग कुआँ, पीछे खाई

हर तरफ हानि की आशंका

आँख का अंधा नाम नयनसुख

गुण के विरूद्ध नाम

आधा तीतर आधा बटेर

बेमेल स्थिति

आप भला तो जग भला

स्वयं अच्छे तो संसार अच्छा

आम का आम गुठली का दाम

सब तरफ से लाभ ही लाभ

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