श्वेत वामन तारे पर एक नजर-
महान भारतीय वैज्ञानिक चंद्रशेखर ने उन तारो का विस्तृत अध्ययन किया जो श्वेेेत वामन तारो में परिवर्तित होकर अपना जीवन स्माप्त करते है। चंद्ररशेखर ने निष्कर्ष निकाला सूर्य के द्रव्यमान के 1.44 गुना से कम द्रव्यमान वाले तार श्वेत वामन तारे के रूप में समाप्त होते है और सूर्य के द्रव्यमान के 1.44 गुना से अधिक द्रव्ययमान के तारे अधिनव तारे के रूप में विस्फोट करते है जो न्यूट्रान तारों या कृष्ण छिद्र मेंं प्रवर्तित होकर अपना जीवन स्माप्त करते है। सौर द्रव्यमान या सूर्य के द्रव्यमान के 1.44 गुना की अधिकतम सीमाको चंद्रशेखर के नाम से जाना जाता है। इसी सिद्धान्त के लिए डॉ. सुब्रमण्यम चंद्रशेखर को 1983 ई0 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।