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आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास
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करने को कुछ आये और करने लगे कुछ और
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इतनी सी जान, गज भर की जबान
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छोटा होना पर बढ़ चढ़कर बोलना
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ईंट का जवाब पत्थर
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दुष्ट के साथ दुष्टता करना
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इस हाथ दे, उस हाथ ले
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कर्मों का फल शीघ्र पाना
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ईश्वर की माया कहीं धूप कहीं छाया
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कहीं सुख, कहीं दुःख
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उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे
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अपराधी ही पकड़ने वाले को डाँट लगाये
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उद्योगिनं पुरुषसिंहनुपैति लक्ष्मी
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उद्योगी को ही धन मिलता है।
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ऊपर-ऊपर बाबाजी, भीतर दागाबाजी
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बाहर से अच्छा भीतर से बुरा।
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ऊँची दूकान फीका पकवान
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बाहर ढकोसला भीतर कुछ नहीं
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ऊँचे चढ़ के देखा, तो घर-घर एकै लेखा
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सभी एक समान
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ऊँट किस करवट बैठता है
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किसकी जीत होती है।
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ऊँट के मुँह में जीरा
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जरूरत से बहुत कम
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ऊँट बहे और गदहा पूछे कितना पानी
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जहाँ बड़ों का ठिकाना नहीं, वहाँ छोटो का क्या कहना
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ऊधों का लेना न माधो का देना
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लटपट से अलग रहना
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एक पंथ दो काज
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एक नहीं दो लाभ
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एक तो करेला आप तीता दूजे नीम चढ़ा
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बुरे का और बुरे संग होना
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अनार सौ बीमार
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एक वस्तु को सभी चाहने वाले
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