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एक तो चोरी दूसरे सीनाजोरी
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दोष करके न मानना
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एक म्यान में दो तलवार
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एक स्थान पर दो उग्र विचार वाले
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ओछे की प्रीत बालू की भीत
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नीचों का प्रेम क्षणिक
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ओस चाटने से प्यास नहीं बूझती
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अधिक कंजूसी से काम नहीं चलता
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कबीरदास की उलटी बानी, बरसे कम्बल भींगे पानी
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प्रकृतिविरूद्ध काम
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कहाँ राज भोज, कहाँ भोजवा (गंगू) तेली
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छोटे का बड़े के साथ मिलान करना
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कहे खेत की, सुने खलिहान की
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हुक्म कुछ और करना कुछ और
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कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा
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इधर-उधर से सामान जुटाकर काम करना
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काला अक्षर भैंस बराबर
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निरा अनपढ़
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काबुल में क्या गदहे नहीं होते
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अच्छे-बुरे सभी जगह है
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का वर्षा जब कृषि सुखाने
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मौका बीत जाने पर कार्य करना व्यर्थ है
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काठ की हाँड़ी दूसरी बार नहीं चढ़ती
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कपट का फल अच्छा नहीं होता
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किसी का घर जले, कोई तापे
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दूसरे का दुःख में देखकर अपने को सुखी मानना
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खरी मजूरी चोखा काम
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अच्छे मुआवजे में ही अच्छा फल होना
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खोदा पहाड़ निकली चुहिया
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कठिन परिश्रम थोड़ा लाभ
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खेत खाये गदहा, मार खाये जोलहा
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अपराध करे कोई, दण्ड मिले किसी और को
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