*जीवाणुओं को सर्वप्रथम एंटनी वान ल्यूवेनहाक ने 1676 ई. में देखा था और उसे जंतुक नाम दिया। *बैक्टीरिया शब्द का प्रयोग एहरेनबर्ग ने 1838 ई. में किया।*लुई पाश्चर और कोच ने यह बताया कि जिवाणु से रोग फैलता है।
*जीवाणु के अध्ययन को जीवणुविज्ञान कहते है। ल्यूवेनहाक को जिवाणुविज्ञान का जनक कहा जाताा है।
*इनमे राइबोसोम स्वतंत्र रूप से पाए जाते है। जिन जीवाणु मेंं क्लोरोफिल पाया जाता है वे प्रकाशसंश्लेेेषी या परपोषित होते है।
* जीवाणु के अनेक रूप होते है-
1. कोकाई :-गोल
2. बैसिलस :- दंडाकार
3. स्पाईरिला :- सर्पिल
4. वाइब्रियो :- कॉमा की तरह
*जीवाणुओं के लाभ-
●जीवाणु नाईट्रोजन को स्थिर रूप में बनाये रखते है,जैसे भूमि में एजोटोबैक्टर और क्लोस्ट्रीडियम तथा लेग्यूमिनेसी कुल के पौधों में राइजोबियम।
●मानव के पाचनतंत्र में पाये जाने वालेे जीवाणु ई. कोलाई पाचन क्रिया में सहायक होते है।
●लैक्टोबैसिलस केसीआई दूध की शर्करा लैक्टोस को किण्वन द्वारा लैक्टिक अम्ल में बदल देता है जिससे दूध खट्टा हो जाता है।
●माइकोकोक्कस मेगाथिरियम चाय के पत्ते में सुगंध पैदा करते है।
एक प्रयोग चमड़े के शोधन एवम जूट के रेेेशे को अलग करने मेंं भी होता है।
*जीवाणुओं से हानि-
●स्ट्रेप्टोकोक्कस,स्टेफाइलोकोक्कस,आदि से निकले विषैले पदार्थ खाद्य पदार्थ को विषैले बना देते है।
●स्पाईरोकीट साईटोफ़ाज कपास के रेेशो को नष्ट कर देते है।
●जिवाणु मिटटी का विनाईटीकरण कर उसकी उर्वरता कम कर देेते है।
* जीवन द्वारा कई प्रकार की औषधि का निर्माण होता है-
*जिवाणु का नाम - प्रतिजैविक
●स्ट्रैप्टोमाइसीस वेनेजुएली-क्लोरोमाइसेटिन
●स्टेप्टोमाइसीस ग्रसियस-स्ट्रेप्टोमाइसीन
●स्टेप्टोमाइसीस फ्रोडी- नियोमाईसीन
●स्टेप्टोमाइसीन रेेमोसस-टैरामाईसीन