रेपो दर और मुद्रास्फीति में संबंध
रेपो दर कम होने से बैंकों के लिये रिज़र्व बैंक से कर्ज़ लेना सस्ता हो जाता है और तभी बैंक ब्याज दरों में भी कटौती करते हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा रकम कर्ज़ के तौर पर दी जा सके। रेपो दर में वृद्धि होने पर सभी प्रकार के क़र्ज़ महँगे हो जाते हैं।
मुद्रास्फीति बढ़ने का एक मतलब यह भी है कि वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में वृद्धि के कारण, बढ़ी हुई क्रय शक्ति के बावजूद लोग पहले की तुलना में वर्तमान में कम वस्तु एवं सेवाओं का उपभोग कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में आरबीआई का कार्य यह है कि वह बढ़ती हुई मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखने के लिये बाज़ार से पैसे को अपनी तरफ खींच ले। अतः आरबीआई रेपो दर में बढ़ोतरी कर देता है ताकि बैंकों के लिये कर्ज़ लेना महँगा हो जाए और वे अपने बैंक दरों को बढ़ा दें तथा लोग कर्ज़ न ले सकें।