अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) की स्थापना हैंग (नीदरलैंड) में जून 1945 ईस्वी को हुई और 3 अप्रैल 1946 ईस्वी से कार्य करना प्रारंभ किया। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को
विश्व का अदालत कहा जाता है। यह विश्व का न्यायिक अंग है। इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 15 होती है जिनका निर्वाचन महासभा एवं सुरक्षा परिषद के द्वारा होता है और इनका कार्यकाल 9 वर्षों का होता है। यह दोबारा चुने जा सकते हैं लेकिन एक देश से सिर्फ एक ही सदस्य चुने जा सकते हैं। प्रत्येक 3 वर्ष पर पांच न्यायाधीश अवकाश ग्रहण करते हैं और इतने ही नियुक्त किए जाते हैं और इसी में एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होते हैं। सभा के कार्यवाही चलाने हेतु कम से कम 9 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक है। न्यायालय की कार्यकारी भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है मान्यता प्राप्त भाषाएं छः है। निर्णय साधारण बहुमत से लिया जाता है। बराबर की स्थिति में अध्यक्ष निर्णायक मत देते हैं।
अभी तक 4 भारतीय अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का न्यायाधीश बने हैं :
- बेनेगल रामाराव – 1952-53
- नागेंद्र सिंह – 1973-1988
- गोपाल स्वरूप पाठक – 1989 - 91
- दलवीर भंडारी – 2012 से वर्तमान
(नागेंद्र सिंहप्रथम भारतीय हैं जिन्होंने न्यायाधीश और अध्यक्ष दोनों पदों पर कार्य किया है 1976 से 79 तक न्यायाधीश और 85 से 88 तक अध्यक्ष।)
वर्तमान (2018) में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष सोमालिया के अब्दुलकवि अहमद युसुफ तथा उपाध्यक्ष चीन के झिऊ हांकिंन हैं।