क्रमशः ...
Day- 63
भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955
- नागरिकता का अर्जन – नागरिकता की प्राप्ति निम्नलिखित माध्यमों से की जा सकती है –
- जन्म से नागरिकता
- वंशक्रम द्वारा नागरिकता
- रजिस्ट्रीकरण द्वारा नागरिकता
- देशीयकरण द्वारा नागरिकता
- अर्जित भू-भाग के समामेलन द्वारा नागरिकता
- जन्म द्वारा नागरिकता की प्राप्ति एक सहज एवं सामान्य माध्यम है। संविधान के लागू होने के पश्चात् जो व्यक्ति भारत में जन्म लेता है, वह स्वतः भारत का नागरिक हो जाता है।
- नागरिकता प्राप्ति का दूसरा माध्यम वंशक्रम है। इसके अनुसार संविधान के लागू होने के पश्चात् लेकिन नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1986 के प्रवर्तन से पूर्व किसी व्यक्ति के भारत के बाहर जन्म लेने पर भी वह भारत का नागरिक होता है, यदि उसके जन्म के समय उसका पिता वंशक्रम से भारत का नागरिक रहा है।
- रजिस्ट्रीकरण द्वारा नागरिकता की प्राप्ति की व्यवस्था ऐसे व्यक्तियों के लिए है जो संविधान अथवा नागरिकता अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत नागरिकता परिधि में नही आते हैं। ऐसे व्यक्ति रजिस्ट्रीकरण द्वारा भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन-पत्र प्रस्तुत करना होता है जो नागरिकता के लिए अपेक्षित शर्ते पूरी हो जाने पर उनका रजिस्ट्रिकरण करता है।
इस व्यवस्था के अन्तर्गत निम्नांकित व्यक्ति नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं-
(क). भारत में उत्पन्न व्यक्ति जो रजिस्ट्रिकरण के लिए आवेदन-पत्र प्रस्तुत करने के पाँच वर्ष पूर्व से भारत में मामूली तौर से निवास कर रहे हों;
(ख). भारत में उत्पन्न व्यक्ति जो भारत के बाहर किसी अन्य देश में मामूली तौर से निवास करते रहे हों;
(ग). भारतीय नागरिकों की विवाहित पत्नियाँ;
(घ). भारतीय नागरिकों के अवयस्क बच्चे;
(ङ) प्रथम अनुसूची में वर्णित कॉमनवेल्थ देशों (इंग्लैण्ड,कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, श्रीलंका, रोडेशिया, आयरलैण्ड आदि) के ऐसे नागरिक जो प्राप्तवय एवं सक्षम व्यक्ति हैं।
मिलते है हम अगले दिन, भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955’ विषय पर फिर आगे चर्चा करने के..