प्राचीन भारतीय इतिहास-1

भारत का सबसे प्राचीन धर्मग्रन्थ वेद है जिसकी संकलन महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने किया। वेद चार हैं-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। वेदत्रयी के अन्तर्गत ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद आते है। सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद हंै एवं अथर्ववेद सबसे बाद का है।

ऋग्वेद मंे मंडलों की संख्या 10 हैं। जिसमे 2 से 7 प्राचीन मंडल है जिसे वंशमंडलभी कहा जाता है।  9वाँ मंडल सोम देवता को समर्पित है।

चातुर्वर्ण समाज की पहली कल्पना ऋग्वेद के 10वें मण्डल के पुरूषसूक्त मंे की गयी है अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र का उल्लेख पहली बार इसमें मिलता है। शूद्रों का पहली बार उल्लेख पुरूषसूक्त में ही मिलता है।

ऋग्वेद में इन्द्र के लिए 250 तथा अग्नि के लिए 200 सूक्तों एवं वरूण के लिए 20 सूक्तों में उल्लेख मिलता है।

रोग निवारण, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, प्रेम-विवाह आदि का वर्णन अथर्ववेद में है।

अथर्ववेद में सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया हैं।

-शेष अगले भाग में

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