प्राचीन भारतीय इतिहास-2

ब्राह्मण साहित्य - ब्राह्मण साहित्य में सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद है। इस ग्रंथ में प्राचीन आर्यों के धार्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन पर कुछ अधिक तथा राजनीतिक जीवन पर कुछ कम प्रकाश पड़ता है।

भारतीय ऐतिहासिक कथाओं का वर्णन पुराणोें में मिलता है।

यजुर्वेद गद्य एवं पद्य वाला वेद है।

सामवेद भारतीय संगीत का जनक है।

उत्तर वैदिक काल के अन्त में उपनिषदों की रचना हुई। इसीलिए इसे वेदान्त कहते हैं। इसमें हमें आर्यो के प्राचीनतम् दार्शनिक विचारों का ज्ञान होता है। इसको पर विद्या या आध्यात्म विद्या कहा गया है।

वेदों के अर्थ को ठीक प्रकार से समझने के लिए वेदांगों की रचना हुई। इनकी संख्या छः है-शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरूक्त, छन्द और ज्योतिष (खगोल विज्ञान)।

पुराणों के रचयिता लोमहर्ष एवं उनके पुत्र उग्रश्रवा है।

महापुराणों की सख्ंया 18 है।

सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण मत्स्य पुराण है।

मौर्य वंश का उल्लेख विष्णु पुराण में है।

गुप्त वंश का उल्लेख वायु पुराण में है।

सातवाहन वंश का उल्लेख मत्स्य पुराण में हैं।

मनुस्मृति सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक स्मृति है। यह विधि ग्रन्थ है। इसका काल 200 ई0पू0 से 200 ई0 तक माना जाता है।

मनुस्मृति के टीकाकार-भारूचि, मेधातिथि, गोविन्दाज और उल्लूकभट्ट है।

-शेष अगले भाग में

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