प्राचीन भारतीय इतिहास-3

जातक कथाओं मंे बुद्व के पूर्व जन्म की कथाये वर्णित है।

बौद्ध साहित्य-सबसे प्राचीन बौद्ध त्रिपिटक है। इनके नाम है-

(i) सुत्तपिटक- बुद्ध के धार्मिक विचारों एवं वचनों का संग्रह है।

(ii) विनय पिटक-बौद्ध संघ के नियमों का उल्लेख है।

(iii) अभिधम्म पिटक-इसमें बौद्ध दर्शन का विवेचन है।

सिंहली मनुस्मृति महावंश एवं दीपवंश है।

मिलिन्दपन्हों में यूनानी राजा मिनांडर और बौद्ध भिक्षु नागसेन का दार्शनिक वार्तालाप है।

बौद्व ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रन्थ भगवती सूत्र में 16 महाजनपदो का उल्लेख मिलता है।

जैनसाहित्य को आगम कहा गया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण 12 अंग है। इनका संकलन पाटलिपुत्र में आयोजित प्रथम जैन सभा में हुई। इस सभा की अध्यक्षता स्थूलभद्र ने किया था।

आचारांगसूत्र-जैन भिक्षुओं के आचार नियमों का उल्लेख।

उवासगदसाओं-इसमें 10 जैन व्यापारियों का वर्णन हैं जिन्होंने जैन धर्म के नियमों का पालन कर मोक्ष प्राप्त किया था।

बारह अंगों में प्रत्येक उपांग भी है। इन पर अनेक भाष्य लिखे गये है जो निर्युक्ति, चूर्णि, टीका कहलाते है।

भद्रवाहुचरित से चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्यकाल की घटनाओं पर प्रकाश पड़ता है।

हेमचन्द कृत परिशिष्टपर्व (12वीं शताब्दी)

उद्योतसूरि (778ई0)-कुवलयमाला, जिनसेन का आदिपुराण

राजतरंगिणी कल्हण द्वारा रचित है जिसमें कश्मीर का इतिहास लिखा गया है। यह पहला क्रमबद्ध ऐतिहासिक ग्रन्थ है। कल्हण ने 1148-49 में इसे कश्मीर के शासक हर्ष के समय में पूरा किया था।

-शेष अगले भाग में

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