गार्गी संहिता यद्यपि एक ज्योतिषग्रंथ है तथापि इसमें कुछ ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख मिलता है। इसमें भारत पर यवन आक्रमण का उल्लेख मिलता है।
अरबों के सिन्ध विजय का विवरण चचनामा में मिलता है। यह मूलतः अरबी भाषा में लिखा गयाा था। कालान्तर में इसका अनुवाद कूफी के द्वारा फारसी भाषा में किया गया।
विदेशी वृतांत
सिकन्दर के पश्चात् लेखकों में तीन राजदूतों-मेगस्थनीज (चन्द्रगुप्त मौर्य), डाइमेकस (बिन्दुसार) तथा डायोनिसियस (अशोक) के नाम उल्लेखनीय है। मेगास्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था। इसने इण्डिका नामक ग्रंथ लिखा जो अब उपलब्ध नहीं है। फिर भी इसके उद्धरण अनेक यूनानी लेखकों एरियन स्ट्रैवो, प्लूटार्क, प्लिनी, जस्टिन एवं डायोनियस आदि उद्धरणों से प्राप्त होता है। स्ट्रैवो ने मेगस्थनीज के वृत्तांत के पूर्णतया असत्य एवं अविश्वसनीय कहा।
डा0 स्वानवेक ने सर्वप्रथम 1846 इन समस्त उद्वरणों को संग्रहीत कर प्रकाशित किया। 1891 में मैक्रिण्डल ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया।
इण्डिका एरियन की भी पुस्तक है।
डायोनिसियस मिस्री शासक में टालमी फिलेडेल्फस का राजदूत था।
अन्य ग्रंथों में टालमी का भूगोल, प्लिनी का नेचुरल हिस्ट्री है।
चीनी यात्री फाहियान, संगयुन, हुएनसांग तथा इत्सिंग है।
फाहियान चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के शासन काल में आया। इसने अपने समकालीन शासक का उल्लेख नहीं किया। इसने मध्यदेश की जनता के बारे में लिखा। इसका यात्रा वृतांत फो-क्यों-की (रिकार्ड आँफ दी बुद्धिस्टिक किंगडम) में किया है।
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