प्राचीन भारतीय इतिहास-6

ह्वेनसांग हर्ष के शासनकाल में भारत आया। इसे शाक्यमुनि एवं यात्रियों का राजकुमार कहा जाता है। इसने हर्ष को शिलादित्य कहा। इसका भ्रमणवृत्तांत सि-यू-की नाम से प्रसिद्ध है जिसमें 138 देशों का विवरण मिलता है। ह्विली में ह्वेनसांग की जीवनी लिखा।

इत्सिंग सातवीं शती में भारत आया। उसने नालन्दा विश्वविद्यालय, विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का उल्लेख किया है।

अरबी पाली-

सुलेमान ने गुर्जर प्रतिहार शासक मिहिरभोज की शक्ति एवं उसके राज्य की समृद्धि की प्रशंसा किया है। वह मिहिरभोज को मुसलमानों का घोर शत्रु बताया है।

अलमसूदी दसवीं शताब्दी में भारत आया। इसने राष्ट्रकूटों के बारे में लिखा।

अष्टाध्यायीः - पाणिनी द्वारा लिखित व्याकरण से सम्बन्धित ग्रन्थ है यह व्याकरण की प्रथम पुस्तक है।

हेरोडोटस को इतिहास का पिता कहा जाता है जिन्होंने हिस्टोरिका की रचना की है। जिसमें भारत और फारस के सम्बन्ध मेें उल्लेख है।

सिकन्दर के साथ निर्याकस, अनासेक्रिटिस, अरिस्टोबुलस भारत आने वाले लेखक थे।

मेगास्थनीज ने इण्डिका नामक पुस्तक की रचना की है जिसमें भारतीय समाज के विषय मंे वर्णन हैं इन्हांेने कहा कि भारत में दास प्रथा प्रचलित नही थी भारतीय समाज सात भागो में बँटा था। यह यवन शासक सेल्युकस का राजदूत था जो मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के समय आया था।

-शेष अगले भाग में

Posted on by