प्राचीन भारतीय इतिहास-7

अलबरूनी-यह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था इसने पुराणों का अध्ययन भी किया था। इसकी रचना तहकीक-ए-हिन्द है जिसमंे भारत के विषय में उल्ल्ेख मिलता हैै। यह गीता से विशेष रूप से प्रभावित था। 

बोगजकोई अभिलेख यह अब तक प्राप्त सबसे प्राचीन अभिलेख है जो 14000पू0 का है। यह मध्य एशिया (आधुनिक तुर्की) मंे प्राप्त हुआ है। इसमें ऋग्वैदिक देवता इन्द्र, मित्र, वरूण और नासत्य का उल्लेख मिलता है। 

भारत में सबसे प्राचीन सिक्के छठीं शताब्दी ई0पू0 मंे पाये गये है, इन्हंे आहत् या पंचमार्क सिक्के कहा जाता था।

सबसे पहले लेखयुक्त सिक्के हिन्द-यवन शासकों द्वारा जारी किया गया। इन्होंने उत्तर भारत में स्वर्ण सिक्के चलाये। इन्हीं को साहित्य में कार्षापण कहा गया है। ये अधिकतर चाँदी के टुकड़े थे।

2060पू0 से लेकर 3000 तक के भारतीय इतिहास का ज्ञान हमें मुख्य रूप से मुद्राओं को सहयोग से ही होता है।

मालव, यौधेय आदि गणराज्यों तथा पंचाल के मित्रवंशी शासकों के विषय में हम मुख्यतः सिक्कों से ज्ञान प्राप्त करते है।

आद्य एतिहासिक- उस काल को कहा जता है जिसमें लिखावट के साक्ष्य तो पाये गये किन्तु उन्हें पढ़ा नही जा सका हैं।

ऐतिहासिक काल-उस काल को कहा जाता है जिसमंे लिखावट का साक्ष्य पाया गया है और उसे पढ़ा भी गया है।

-शेष अगले भाग में

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