प्रागैतिहासिक काल-
इस काल का कोई लिखित साधन उपलब्ध नही है। प्रागैतिहासिक काल उस काल को कहते है जिसमें मानव को लेखन कला का ज्ञान नहीं था। भारतीय प्रागैतिहासिक काल को उद्घाटित करने का श्रेय डा0 प्राइमरोज नामक एक अंग्रेज को है।
भारत में पाषाण कालीन बस्तियों के अन्वेषण की शुरूआत 1863 में जियोलाकिल सर्वे से सम्बद्ध अधिकारी राबर्ट ब्रूश फुट ने की। फुट पेशे से भू-वैज्ञानिक थे। ये चेन्नई के समीप पल्लवरम कुछ पाषाण औजार प्राप्त किये।
मानव विकास-
मानव का आदिपूर्वज आस्ट्रेलोपिथेकस मानव को माना जाता है। यह सबसे पहला वानर मानव था जो सीधा चलता था और मध्य अफ्रीका में पाया गया। वह पूर्व अत्यन्त नूतन (पूर्व प्लीस्टोसीन) काल में प्रकट हुआ। इसकी एक उपजाति जिन्जैनथ्रोपस औजार बनाती थी। ये संभवतः 5 लाख वर्ष पहले रहते थे।
जावा से प्राप्त होमीनिड (आदिमान) जो सीधा चलता था, को पिथिकैन्थ्रोपस इरेक्टस अथवा होमोइरेक्टस कहा गया।
पीकिंग (चीन) प्रान्त होमीनिड पीकिंग मानव या सिनेन्था्रपस कहा जाता हैं यह आदिमानव आग जलाना जानता था।
जर्मनी के नियन्डर्थल घाटी से निमन्डर्थल मानव की हड्डिया प्राप्त हुई है। यह मध्यपुरापाषाण काल का प्रतिनिधित्व करता है। यह मानव अपने मृतकों का आदर करता था, शवों को पूजा सामग्रियों सहित कब्रों में दफनाता था। इस तरह इसका कर्म एवं पुनर्जन्म में विश्वास था। नियाण्डरथल के बाद आज से लगभग 40000 वर्ष पूर्व आधुनिक मानव होमोसैपियन्स का उद्भव हुआ। इसकी उपजातियाँ-क्रोमैगमन, ग्रिमाल्डी चान्सलेड थी।
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