प्राचीन भारतीय इतिहास-9

मानव सभ्यता के प्रारम्भिक काल को तीन भागों में बाँटा गया है।

1.    पुरापाषाण काल - (क) पूर्व पुरापाषाण काल (ख) मध्य पुरापाषाण काल (ग) उच्च पूरापाषाण काल

(क)   पूर्व पुरापाषाणकाल-

      इस काल मानव मुख्यतः क्वार्टजाइट पत्थरों का उपयोग उपकरण बनाने के लिए करता था।

      इस काल के प्रमुख उपकरण हस्तकुठार (हैण्डएक्स) और क्लीवर है।

      इस काल में नर्मदाघाटी के हथनोरा से मानव खोपड़ी के प्रमाण मिले है।

      भीमबेटका (रायसेन म0प्र0) से पुरा चित्रों के अवशेष मिले है।

      उ0प्र्र0 के मिर्जापुर जिले की बेलनघाटी से पूर्व पुरापाषाण काल से लेकर नवपाषाणकाल तक के उपकरणों का एक अनुक्रम पाया जाता है। बेलन के लोहदा नाला क्षेत्र से इस काल की अस्थि निर्मित मातृदेवी की एक प्रतिमा प्राप्त हुई थी। 

      इस काल के मानव को कृषि की जानकारी नही थी। इस काल का मानव आखेटक और खाघ संग्राहक था। पशुपालन की शुरूआत नहीं हुई थी। इस काल के मानव को अग्नि का ज्ञान हो गया था परन्तु वह इसके प्रयोग से परिचित नहीं था।

(ख)   मध्यपुरापाषाण काल

      इस काल में क्वार्टजाइट पत्थरों के स्थान पर जैस्पर, चर्ट, फ्लिंट आदि पत्थर प्रयुक्त होने लगे। इस समय का उद्योग मुख्यतः शुल्क की बनी वस्तुओं का था। इस समय के मुख्य औजार फलक, छेदनी और खुरचनी थे। फलकों की अधिकता के कारण इस काल को फलक संस्कृति की संज्ञा दी गयी।

-शेष अगले भाग में

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