प्राचीन भारतीय इतिहास-10

(ग)   उच्च पुरापाषाण काल-

      इस काल में आधुनिक मानव होमोसैपियन्स का उद्भव हुआ।

      इस काल के उपकरण ब्लेड पर बने हैं।

      बेलन घाटी में स्थित चोपनीमाण्डों में उच्चपुरापाषाण काल से लेकर नवपाषाण युग तक के क्रम का पता चला है।

2.    मध्यपाषाण काल

      भारत में मानव अस्थिपंजर मध्यपाषाण काल से सर्वप्रथम प्राप्त होने लगते है। इस काल के उपकरणों को माइक्रोलिथिक या सूक्ष्म पाषाण काल कहा गया है।

      राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी के तट पर स्थित बागौर भारत का सबसे बड़ा मध्यपाषाणिक स्थल है। मध्यप्रदेश के आदमगढ़ और वागौर से पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त होता है।

      सरायनाहर राय (प्रतापगढ़) से स्तम्भगर्त के प्रमाण मिलते है।

      महदहा (प्रतापगढ़) से स्तम्भगर्त, मृग श्रृंग के छल्लों की माला, हड्डियों के आभूषण और युगल शवाधान प्राप्त होता है।

3.    नवपाषाण काल या उत्तरपाषाण काल

      इस काल में मानव ने कृषि कार्य, पशुओं को पालना, मृदभाण्ड बनाना, अग्नि का प्रयोग, कपड़ों की कताई, बुनाई, रंगाई और सिलाई करना सीख लिया था।

      मानव द्वारा सर्वप्रथम प्रयोग में लायी गयी धातु ताँबा तथा फसल जौ थी।

      मेहरगढ़ में नवपाषाणकाल से समृद्ध हड़प्पा काल तक एक लम्बा सांस्कृतिक इतिहास रहा है। भारत में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य मेहरगढ़ से प्राप्त होता है। इसे बलुचिस्तान की रोटी की टोकरी कहा गया है। यही से कपास की खेती के सर्वप्रथम प्रमाण प्राप्त होता है।

-शेष अगले भाग में

Posted on by