अकबर महान (1556-1605 ई.) 'पार्ट प्रथम'

15 अक्टूबर 1542 ईसवी को अकबर का जन्म अमरकोट में राणा वीरसाल के महल में हुआ था। अकबर के पिता का नाम हुमायूं तथा माता का नाम हमीदा बानो बेगम था

जन्म के कुछ समय बाद हुमायूं को कुछ समय के लिये निर्वासित जीवन जीना पड़ा ।जिसके कारण अकबर अस्करी के यहां पला-बढ़ा था। अस्करी के संरक्षण में अकबर को बदरुद्दीन के नाम से पुकारा जाता था ।1545 ईस्वी में जब हुमायूं ने काबुल को जीता तो उस समय पिता और पुत्र की मुलाकात हुई थी।

1546 में खतना तथा नामकरण हुआ था ।तथा उसका नाम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर रखा गया था ।वीर मोहम्मद तथा बैरम खां अकबर के दो प्रारंभिक शिक्षक नियुक्त किए गए ।अकबर को शिक्षा में कोई रुचि नहीं थी। वह शिकार करना ,घुड़सवारी करना ,तलवारबाजी करना, इत्यादि में रुचि रखता था लेकिन वह अत्यंत तीव्र बुद्धि का था।

अकबर को प्रबुद्ध निरंकुश कहा गया है अकबर को  1551 ईसवी में मात्र 9 वर्ष की अवस्था में गजनी के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था। 1555 ईस्वी में हुमायु के द्वारा लड़े गए कई भारत के युद्ध में अकबर ने भी भागीदारी निभाई थी ।22 जून 1555 ईसवी को अकबर का विवाह अकबर के चाचा हिंदाल की पुत्री रुकैया बेगम से हुआ था।

पंजाब जीतने के उपलक्ष में हुमायूं ने अकबर को पंजाब का सूबेदार या राज्यपाल बनाया था ।24 जनवरी 1556 ईसवी को हुमायूं की मृत्यु हुई। उस समय अकबर पंजाब के गुरदासपुर जिले में कालानौर नामक स्थान पर मौजूद था। जहां पर 14 फरवरी 1956 ईस्वी को बैरम खां के नेतृत्व में अकबर कासिम मिर्जा के द्वारा राज्याभिषेक करवाया गया था।

Posted on by