*नील हरित शैवाल निम्न श्रेणी के पादप होते है,जिसे सायनोबैक्टीरिया भी कहाँ जाता है।
*यह एककोशिकीय जीवाणु है,जो तन्तु के आकार के होते है।
*इस जीवाणु को धान की फसल के लिए वायुमंडलीय नाइट्रोजन को भूमि में संस्थापित कराने के उद्देश्य से उपयोग में लाया जाता है।
*यह शैवाल प्रकाश संश्लेषण से ऊर्जा प्राप्त करके वायुमंडलीय नाइट्रोजन को भूमि में स्थिरीकरण करता है। धान के खेत मेंं चूकि पानी भरा रहता है एतएव नीलहरित शैवाल द्वारा नाइट्रोजन का स्थिरीकरण एक विशिष्ट कोशिका हेटरोसिस्ट द्वारा किया जाता है।
*इस शैवाल की प्रमुख प्रजातियां है-नास्टॉक, एनाबीना, क्लोथ्रीक्स, ओलोसिरा आदि।
* धान की खेत मे नीलहरित शैवाल के उपयोग से 20 से 40 किलो नाइट्रोजन का प्रति हेक्टेयर स्थिरीकरण होता है।
*मृदा में कार्बनिक पदार्थो तथा अन्य पौधवर्द्धक रसायनों जैसे- ऑक्सिन, जिब्रेलिन्स, पाईरीडोक्सिन आदि की सूक्ष्म मात्रा होती है, जिसमे फसल के उत्पाद में लगभग 20% वृद्धि होती है। अम्लीय तथा क्षारीय मृदा का सुधार होता है।