अकबर 13 वर्ष और 29 दिन की आयु में मुगल बादशाह बना ।अकबर ने गद्दी पर बैठने के पश्चात अपना वकील अपने संरक्षक बैरम खां को बनाया ।अकबर के शासन काल को तीन भागों में विभाजित किया जाता है ।1-बैरम खां के संरक्षण का कार्यकाल 1556 से 1560ईसवी तक माना जाता है।2- पेटिकोट या पर्दा शासनकाल 1560 ईस्वी से 1562 ईस्वी तक। 3- अकबर का स्वयं का प्रशासन 1562 ईस्वी से 1605 ई तक।
पानीपत का द्वितीय युद्ध 5 नवंबर 1556 ईसवी को हुआ था। यह अकबर और हेमू के बीच युद्ध हुआ था ।इसमें अकबर विजय हुआ था ।हेमू सिकंदरसूूूर का सेनापति था वह आगरा के नमक के व्यापारी का पुत्र था ।हुमायु के मरते ही हेमू नेे आगरा और दिल्ली पर अधिकार कर लिया था। जिसके कारण अकबर काबुल वापस लौटने का मन बना लिया था ।लेकिन बैरम खान के आश्वासन दिए जाने के कारण वह पानीपत के मैदान में रुके।
पानीपत के इस युद्ध में एक तीर हेमू के आंखों में लगी ।और युद्ध का तस्वीर बदल गया था। हेमू को पकड़कर उसे मार डाला गया था। तथा पूरे भारत में मुगल वंश की स्थापना की गई थी ।इस युद्ध पर प्रोफेसर आर पी त्रिपाठी ने कहा है कि हेमू की पराजय एक दुर्घटना थी ।तथा अकबर का विजय एक दिव्य संयोग था।
बैरम खा का पतन- बैरम खां एक सिया मुसलमान था उसने मुगल राज्य को स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया था। उसने हुमायूं तथा अकबर के दुर्दिन में पूरी ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक साथ दिया था ।जब अकबर गद्दी पर बैठा तो उसकी स्थिति अत्यंत दुर्बल थी। बैरम खान ने अपनी सैनिक प्रतिभा और मजबूत सूझबूझ से स्थित को मजबूत किया था। बैरम खान के खिलाफ दरबार में संयन्त्र होने लगे जिसके कारण बैरम खां अप्रैल 1560 ईसवी में नागौर की ओर प्रस्थान किया था।