मोहम्मद शाहजहां का जन्म 5 जनवरी 1592 ईसवी को हुआ था। इनका जन्म स्थान लाहौर था इनका मूल नाम खुर्रम था ।माता का नाम जगत गोसाई था जो जोधपुर के राजा उदय सिंह की पुत्री थी। पिता का नाम जहांगीर था इनका राज्याभिषेक 4 फरवरी 1628 ईसवी को हुआ था।
शाहजहां की प्रारंभिक शिक्षा की ओर विशेष ध्यान दिया गया। शाहजहां का प्रथम शिक्षक मुल्ला कासिम वेग था। इसके पश्चात हाकिम अली गिलानी को शाहजहां का दूसरा शिक्षक नियुक्त किया गया जो उच्च कोटि का साहित्यकार और चिकित्सा शास्त्री था ।शाहजहां ने फारसी अरबी तथा अन्य भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया था ।इसके अतिरिक्त शाहजहां को घुड़सवारी बंदूक तथा तेेतीरंंदाजी का भी शौक था।
शाहजहां का विवाह आसिफ खान की बेटी अर्जुमंद बानो बेगम से हुआ था। इसे शाहजहां ने मुमताज महल की उपाधि से विभूषित किया शाहजहां का दूसरा विवाह सफाई वंश के राजकुमारी मुजफ्फर हुसैन की पुत्री से हुआ था। शाहजहां का तीसरा विवाह अब्दुल रहीम खानखाना की पौत्री से हुआ था।
शाहजहां ने केवल मुमताज से 14 संतान प्राप्त हुए जिसमें से कुल 7 संतान जीवित रहे जो निम्नलिखित हैं शाहजहां की पहली पुत्री जहांआरा बेगम थी। और उसका पुत्र दाराशिकोह सबसे बड़ा पुत्र था। शाहशुजा,औरंगजेब, मुराद बख्श, इत्यादि पुत्र शाह जहां के थे।
खान-ए-जहां लोदी का विद्रोह (1628-30 ई)
खान ए जहां लोदी का विद्रोह शाहजहां के शासनकाल का प्रथम विद्रोह था। वह एक अखबार अफगान अमीर था उसका वास्तविक नाम पीर खान था। जहांगीर इस की सेवा से प्रसन्न होकर के खाने जहां की उपाधि से विभूषित किया था। 1626 ईसवी में शहजादा परवेज की मृत्यु के बाद उसे दक्कन का सूबेदार बनाया गया था। दक्कन का मुख्यालय बुरहानपुर था। अन्य अफगानों की भांति खाने जहां भी स्वतंत्र राज्य की स्थापना पर बल दिया तब शाहजहां ने विद्रोह किया था ।तब उस समय उसने जहांगीर का साथ दिया था। शाहजहां ने इसे आगरा आने का आदेश दिया लेकिन यह आगरा ना आकर शाहजहां के खिलाफ विद्रोह कर दिया। शाहजहां ने अपनी शाही सेना को इस विद्रोह का दमन करने के लिए भेजा। यह शाही सेना से बचते हुए बुंदेलखंड के बांदा क्षेत्र में पहुंचा बांदा में सिहोदा के जमींदार माधव सिंह के द्वारा मार डाला गया था।
बुंदेलों का विद्रोह (1628)
1627 ईस्वी में वीर सिंह बुंदेला की मृत्यु हुई और उसका उत्तराधिकारी जुझारसिंह हुआ। जुझारसिंह राज्य की जिम्मेदारी पुत्र विक्रमजीत को सौंपकर मुगल दरबार में रहने लगा। विक्रमजीत ने अपनी प्रजा पर अत्यधिक टैक्स लगाया और कठोरता से वसूली की ।इसी समय शाहजहां के उत्तराधिकारियों ने बताया कि जुझारसिंह अवैध तरीके से धन की वसूली कर रहा है ।जिसके कारण जुझारसिंह को शाहजहां ने तलब किया और धन के जांच करने का आदेश दिया सुझाव सिंह इसे अपना अपमान समझा और बिना बादशाह की आज्ञा से आगरा से बुंदेलखंड चला गया ।यह अपनी राजधानी ओरछा पहुंचने के बाद युद्ध की तैयारी करने लगा शाहजहां ने बुंदेलखंड पर तीन तरफ से आक्रमण करने का आदेश दिया ।महावत खां के नेतृत्व में जुझार सिंह ने दमन करने के लिए एक विशाल सेना भेजी थी।