शाहजहां के शासनकाल में उत्तराधिकार का युद्ध

8 सितंबर 1657 ईसवी को शाहजहां अचानक बीमार पड़ गया था ।इस कारण वह राजकीय कार्य में अक्षम हो गया था। तथा धर्म झरोखा दर्शन देने के लिए उपस्थित नहीं हुआ इस समय शाहजहां के बाकी पुत्र शाह शुजा बंगाल में था ।मुराद गुजरात में और औरंगजेब दक्षिण भारत में था। जबकि दाराशिकोह शाहजहां के पास था और शाहजहां ने इसे ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।

इसी समय जनता के बीच तथा शहजादों के बीच यह अफवाह फैली की दारा शिकोह शाहजहां को बंदी बना लिया है। और स्वयम प्रशासन कर रहा है बंगाल के सूबेदार शाहसुजा ने सर्वप्रथम उत्तराधिकार की शुरूआत किया था।

बहादुर पुर का युद्ध

यह युद्ध 14 फरवरी 1658 ईसवी को शाही सेना और शाहशुजा के बीच वाराणसी के समीप लड़ा गया था ।इस युद्ध में शाही सेना का नेतृत्व दाराशिकोह का पुत्र सुलेमान शिकोह और अमीर के राजा जयसिंह के द्वारा किया गया था

इस युद्ध का परिणाम शाही सेना के पक्ष में गया सासू जा पराजित होकर बंगाल भाग गया था।

धरमट का युद्ध (15 अप्रैल 1658)

धर्मत मध्यप्रदेश के उज्जैन के समीप स्थित है ।इस युद्ध में एक तरफ शाही सेना थी तो दूसरी तरफ मुराद और औरंगजेब की सेना थी।

इस युद्ध में शाही सेना का नेतृत्व जसवंत सिंह और कासिम खान ने किया था ।इस युद्ध में मुराद और औरंगजेब की संयुक्त सेना ने शाही सेना को पराजित किया। इस युद्ध में पराजित होने के बाद जसवंत सिंह भागकर जोधपुर पहुंचा जहां पर रानी  ने किला का फाटक नहीं खोला

सामू गढ़ का युद्ध

यह युद्ध 29 मई 1658 ईस्वी को आगरा के समीप लड़ा गया था। यह युद्ध औरंगजेब एवं मुराद की संयुक्त सेना तथा दर्शकों के बीच लड़ा गया था ।इस युद्ध में  वह युद्ध भूमि से सामने भागने के लिए मजबूर हुआ। इस युद्ध में सफलता के बाद औरंगजेब ने आगरा में अपना राज्यभिषेक करवाया था।

Posted on by