औरंगजेब (1658-1707 ई.) का शासन पार्ट प्रथम

औरंगजेब ने अबुल मुजफ्फर मुजाहिद्दीन मोहम्मद औरंगजेब बहादुर आलमगीर बादशाह गाजी की उपाधि धारण की थी। इनका जन्म 24 अक्टूबर 1618 ईसवी में उज्जैन के समीप दो हाथ नामक स्थान पर हुआ था। उनकी माता का नाम मुमताज महल तथा पिता का नाम शाहजहां था। शाहजहां ने इसकी वीरता से प्रसन्न होकर बहादुर की उपाधि से विभूषित किया था।

जब 16 से 26 ईसवी में शाहजहां ने अपने पिता के जहांगीर के खिलाफ विद्रोह किया था। उस समय औरंगजेब की आयु 8 वर्ष थी उसे बंदी बनाकर नूरजहां के पास जमानत के रुप में रखा गया था। औरंगजेब के शिक्षा-दीक्षा पर पूरी तरह से ध्यान दिया गया था। मीर कासिम गिलानी तथा अब्दुल लतीफ सुल्तानपुरी को औरंगजेब का आज शिक्षक नियुक्त किया गया था ।औरंगजेब अरबी फारसी हिंदी का अच्छा ज्ञान अर्जन किया था। 28 मई 16 से 33 ईसवी को जब औरंगजेब सुधाकर और सुंदर नामक दो हाथियों का युद्ध देख रहा था। तभी एक हाथी सुधाकर उत्तेजित होकर औरंगजेब पर हमला कर दिया। लेकिन औरंगजेब ने साहस दिखा कर उसकी हत्या कर दी ।इसी वजह से शाहजहां ने बहादुर की उपाधि औरंगजेब को दे दी थी।

1648 से 52 ईसवी तक मुल्तान और सिंध का सूबेदार बनाया गया था 1652 ईस्वी में औरंगजेब को दक्षिण भारत का दूसरी बार सूबेदारी प्राप्त हुई थी। औरंगजेब 1658 में धर्म और श्यामू गढ़ के युद्ध में अपने बड़े भाई दारा शिकोह को पराजित किया था ।औरंगजेब प्रथम मुगल बादशाह था ।जो अपना दो बार राज्याभिषेक करवाया पहला राज्य अभिषेक 1658 ईस्वी में आगरा में करवाया था। और दूसरा राज्य अभिषेक 1659 ईस्वी में दिल्ली में करवाया था।

औरंगजेब के प्रारंभिक कार्य

गद्दी पर बैठने के पश्चात औरंगजेब कई तरह की समस्याओं से घिरा हुआ था। आंतरिक कलह के कारण पूरी प्रशासनिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई थी ।जागीरदार किसानों से विभिन्न टैक्स की वसूली करते थे। औरंगजेब ने जनता से लिए जाने वाले 80 विभिन्न प्रकार के करों को एक साथ माफ कर दिया ।जिसमें सरदारी और बांदरी भी शामिल था। राहदारी एक परिवार परिवहन करता जबकि पंधारी एक चुंगी कर था। जो व्यापारियों से लिया जाता था औरंगजेब ने अपना मुंह नसीब समरकंद के निवासी मौला अजवाहीव को नियुक्त किया ।जो प्रजा के नैतिक आचरण माप तौल की जांच तथा मंदिरों के जुड़वाने का कार्य करता था ।यह जनता के जना चरण का निरीक्षण भी करता था ।औरंगजेब ने झरोखा दर्शन नवरोज त्योहार राजपूतों को टीका लगाया जाने की प्रथा सिक्कों पर कलमा खुदवाना दरबार में संगीत ज्योतिष इत्यादि को बंद करवा दिया था।

Posted on by