औरंगजेब (1658-1707 ई.) का शासन काल के विद्रोह पार्ट द्वितीय

जाट विद्रोह

औरंगजेब के समय में उत्तरी भारत में होने वाला प्रमुख विद्रोह जाटों का था जाट पेशे से किसान थे ।तथा वे यमुना नदी के किनारे दिल्ली से आगरा तक फंसे हुए थे ।जाटों के इस विद्रोह का प्रमुख कारण आर्थिक था ।औरंगजेब से पहले भी मुगलकालीन की नीतियों से यह समय समय पर विद्रोह करते रहे हैं औरंगजेब के समय मथुरा का फौजदार अब्दुल नबी था।

जो मथुरा के जाटों पर अत्याचार करता था। इस अत्याचारों से शब्द होकर 1669 ईस्वी में गोकुला ने विद्रोह कर दिया था ।गोकुल मथुरा के लिपू पथ का जागीरदार था। इसने मथुरा को लूटा तथा मुगल फौजदार अब्दुल नबी की हत्या कर दी थी।

विद्रोहियों को नियंत्रित करने के लिए हसन अली को मथुरा का फौजदार बनाया गया। हसन अली ने गोकुला को मारकर मथुरा में शांति स्थापित की 1686 ईस्वी में राजा राम के नेतृत्व और राम चेहरा के नेतृत्व में जाटों का दूसरा विद्रोह हुआ था ।इस विद्रोह के समय जाटों ने 1686 ईस्वी के समय सिकंदरा स्थित अकबर का मकबरा को लूटा तथा उसे आग में जला दिया था। राज राम ने जाटों को आर्मी पद्धति के अनुसार संगठित किया तथा जाट क्षेत्रों में जमीनदारी प्रथा की शुरुआत की 1688 ईस्वी में राजाराम औरंगजेब की सेना से लड़ता हुआ मारा गया था। राजा राम की मृत्यु के पश्चात उसके भतीजा चूड़ामन ने जाटों के खिलाफ विद्रोह जारी रखा था। तथा राजस्थान के भरतपुर में स्वतंत्र राज्य की स्थापना की थी। चूड़ामन की मृत्यु के पश्चात इसका पुत्र बदन सिंह भरतपुर का राजा बना था।

Posted on by