औरंगजेब के महत्वपूर्ण विद्रोह (1658-1707ई.)

औरंगजेब और मराठा

जब औरंगजेब दक्षिण भारत का सूबेदार था तभी 1656 ईसवी में शिवाजी से उसका सामना हुआ ।अपने परिस्थिति को अनुकूल ना समझकर शिवाजी ने अपने आप को युद्ध क्षेत्र से पीछे निकाल दिया। इसके पश्चात औरंगजेब अपने गृह युद्ध में फंस गया। जिसके कारण शिवाजी के उत्थान का अवसर मिला। 1659 ईस्वी में शिवाजी ने बीजापुर के प्रमुख सरदार अब्दुल्लाह भत्तारी उर्फ अफजल खान को पराजित किया ।और वह महाराष्ट्र के नायक बन बैठे ।1660 ईसवी में शिवाजी का गबन करने के लिए औरंगजेब अपने मामा शाइस्ता खां को नियुक्त किया। शाइस्ता खान ने शिवाजी के कई जिलों पर अधिकार कर लिया था।

1663 ईस्वी में शिवाजी ने पुणे के साहिस्ता खान के महल में प्रवेश किया था तथा इस आक्रमण में सहायता खान का पुत्र मारा गया। तथा शाइस्ता खां के हाथ की उंगली कट गई। इस तरह शाइस्ता खां पुणे से भागने में सफल रहा। 1664 ईस्वी में शिवाजी ने सूरत पर प्रथम आक्रमण किया ।तथा इस आक्रमण में वह केवल मुगल व्यापारिक केंद्रों को निशाना बनाया था ।जिसके कारण औरंगजेब शिवाजी से नाराज होकर आमेर के राजा जय सिंह के नेतृत्व में सेना भेजी थी।

पुरंदर का युद्ध (1665 ई.)

 या युद्ध शिवाजी तथा मुगल सेना के सेनापति जयसिंह के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में शिवाजी की पराजय हुई और वह संधि करने के लिए मजबूर हुए इसी को पुरंदर की संधि कहा जाता है।

यह संदेश शिवाजी और जयसिंह के बीच हुई इस संधि के निम्नलिखित बिंदु हैं।

शिवाजी ने अपने 35 किलो में से 23 किलो मुगलों को सौंपना पड़ा और 12 किला पर शिवाजी का अधिकार बना रहा। शिवाजी के पुत्र संभाजी को मुगल दरबार में 5000 का मनसबदारी नियुक्त किया गया था ।शिवाजी को आगरा आने का निमंत्रण दिया गया और माफी मांगने को कहा गया इस समय फ्रांसीसी यात्री बर्नियर भी मौजूद था। 1666 ईस्वी में शिवाजी औरंगजेब से मिलने आगरा पहुंचे जहां पर उन्हें 5000 के मनसबदारों की पंक्ति में खड़ा कर दिया गया था ।शिवाजी ने औरंगजेब को भला-बुरा सुनाना प्रारंभ किया जिससे शिवाजी को कैद कर लिया गया था ।और आगरा के जयपुर भवन में रखा गया था ।दक्षिण भारत से वापस आते वक्त मुगल सेनापति जय सिंह की मृत्यु हो गई ।जिसके कारण शिवाजी को कैदखाने से बाहर निकालने का कार्य उनका पुत्र राम सिंह ने किया था ।शिवाजी के हमशक्ल हिरोजी फर्जंद को कैदखाने में बैठा दिया गया ।और शिवाजी को फलों की टोकरी में बैठाकर बाहर निकाला गया था ।शिवाजी पुणे महाराष्ट्र पहुंचने के पश्चात मुगलों को दिए गए किलों को एक-एक करके जीत लिया ।1667 ईस्वी में औरंगजेब ने एक पत्र भेजकर राजा की उपाधि से विभूषित किया था ।1670 ईस्वी में शिवाजी ने दूसरी बार सूरत को लूटा इस बार भी उन्होंने मुगल प्रतिष्ठान को निशाना बनाया था।

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