बुर्जहोम (श्रीनगर) एकमात्र नवपाषाणिक स्थल है जहाँ एक कब्र में मालिक के साथ कुत्ते को दफनाये जाने का साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
कोलडिहवा (इलाहाबाद) से तीन सांस्कृतिक अनुक्रम नवपाषाण काल, ताम्रपाषाण काल और लौहयुग देखे गये है। यहाँ के उत्खनन से 6000 ई0पू0 आस-पास धान उगाये जाने के प्रमाण मिले है। इसे चावल की खेती का भारत ही नहीं, बल्कि विश्व में सबसे पुराना साक्ष्य माना जाता है।
नवपाषाण काल में वुर्जाहोम (कश्मीर) से प्राप्त कब्रो मे पालतू कुत्तों को मालिक के साथ दफनाया जाता था।
नव पाषाण काल में चिरांद (बिहार) मात्र एक ऐसा स्थल है जहाँ से हड्डी के उपकरण प्राप्त किये गये है।
कोल्डीहवा (इलाहाबाद) नवपाषाण कालीन एक मात्र पुरास्थल है जहाँ से चावल के प्राचीनतम् साक्ष्य लगभग (6000ई0पू0) के प्राप्त हुआ है।
आदमगढ़ एवं बागोर से पशुपालन के प्राचीनतम् साक्ष्य मिलते है।दक्षिण भारत में नवपाषाण सभ्यता का मुख्य स्थल बेलारी (कर्नाटक) है।
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