ऑरोरा है क्या ?
सामान्यतौर पर रात के समय या सुबह होने से ठीक पहले पृथ्वी के दोनों ध्रुवों अर्थात दक्षिणी और उत्तरी ध्रुव के आसमान में हरे, लाल और नीले रंग के मिश्रण से उत्पन्न इस प्रकाश को ऑरोरा कहते हैं।
विभिन्न प्रकार के ऑरोरा में से कुछ सूर्योदय से पहले भी दिखाई देते हैं।
इस अद्भुत प्राकृतिक नजारे को विश्व के अजूबों में गिना जाता है।
ध्रुवों के पास ही इनकी स्थानीय उत्पत्ति की वज़ह से इन्हें ध्रुवीय ज्योति, उत्तर ध्रुवीय ज्योति या दक्षिण ध्रुवीय ज्योति कहा जाता है।
उत्तरी अक्षांशों की ध्रुवीय ज्योति को सुमेरु ज्योति (Aurora Borealis) या उत्तर ध्रुवीय ज्योति के नाम से जाना जाता है।
वहीं, दक्षिणी अक्षांशों की ध्रुवीय ज्योति को कुमेरु ज्योति (Aurora Australis) या दक्षिण ध्रुवीय ज्योति के नाम से जाना जाता है।
उत्पत्ति के पीछे भौतिक कारण -
वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि ऑरोरा की उत्पत्ति इलेक्ट्रॉन और प्लाज़्मा तरंगों के परस्पर मिलने से होती है।
इलेक्ट्रॉन और प्लाज़्मा तरंगों के परस्पर मिलने की यह प्रक्रिया पृथ्वी के बाहरी वातावरण के मैग्नेटोस्फेयर में होती है।
मैग्नेटोस्फेयर के इलैक्ट्रिक कण ग्रह के चुम्बकीय क्षेत्र से नियंत्रित होते हैं।