सिन्धु सभ्यता
भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता को सिन्धु सभ्यता के नाम से जाना जाता है। जिसकी खोज रायबहादुर दयाराम साहनी ने 1921 ई0 में किया था।
सिन्धु सभ्यता को आद्यएतिहासिक या कास्ययुगीन सभ्यता कहा जाता है। वर्तमान में इसका सबसे उपयुक्त नाम हड़प्पा सभ्यता है क्योंकि सबसे पहले इस सभ्यता के हड़प्पा नामक स्थल को ही खोजा गया था।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना 1861ई0 में वायसराय लार्ड कैनिंग के समय की गयी।
भारतीय पुरातत्त्व विभाग की स्थापना वायसराय लार्ड कर्जन के समय की गयी।
भारतीय पुरातत्त्व का जन्मदाता अलेक्जेंडर कनिंघम को माना जाता है।
भारतीय पुरातत्त्व विभाग के महानिदेशक जान मार्शल के निर्देशन में 1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा की तथा 1922 ई0 में राखालदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ों की खोज की।
भू-मध्य सागरीय (मेडिटेरियन) प्रजाति को सैन्धव सभ्यता का निर्माता माना जाता है।
अफगानिस्तान में सैन्धव सभ्यता के दो महत्वपूर्ण स्थल मुण्डीगाक और शोर्तघुई है।
जान मार्शल ने सर्वप्रथम इसे सिन्धु सभ्यता का नाम दिया।
सिन्धु सभ्यता की सर्वमान्य तिथि कार्बन डेटिंग(ब्14) के आधार पर 2350ई0पूर्व से 1750ई0पू0 है।
सिन्धु सभ्यता का सबसे पश्चिमी स्थल सुतकांगेडोर (ब्लूचिस्तान)।
सिन्धु सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल आलमगीरपुर, मेरठ (उत्तर प्रदेश)
सिन्धु सभ्यता का सबसे उत्तरी स्थल मांडा (ज0क0)
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