लोक अदालत कानूनी विवादों के मैत्रीपूर्ण समझौते के लिऐ वैधानिक मंच है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 ( संशोधन 2002 ) द्वारा लोक उपयोगी सेवाओं के विवादों के सम्बन्ध मे मुकदमेबाजी पूर्ण सुलह और निर्धारण के लिऐ स्थायी लोक अदालतो की स्थापना के लिऐ प्रावधान करता है।
ऐसे फौजदारी विवादों को छोडकर जिनमे समझौता नही किया जा सकता है। दीवानी, फौजदारी, राजस्व विभागो मे लंवित सभी कानूनी विवाद मैत्रीपूर्ण समझौते के लिऐ लोक अदालत मे लाऐ जा सकते है,
कानूनी लड़ाई को लोक अदालतेंं मुकदमा दायर होने से पूर्व भी अपने यहॉ स्वीकार कर सकती है। लोक अदालत के निर्णय अन्य किसी दीवानी न्यायलय के समान ही दोनो पक्षो पर लागू होते हैं।
यह निर्णय अन्तिम होते है,लोक अदालतो द्वारा किए गए निर्णयों के विरूध्द अपील नही की जा सकती।
देश के सभी जिलो मे लगलभ स्थायी तथा सतत लोक अदालतेंं स्थापित की गई है।लोक अदालत 5लाख तक के दाबे पर विचार कर सकती है।