ग्लोबल वॉर्मिंग या भू उस्मिय तापमान

आसान शब्दों में समझें तो ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ है पृथ्वी के तापमान में हो रही इसकी वृद्धि और इसके कारण मौसम में हो रहे परिवर्तन ’(जिसे 100 सालों के औसत तापमान पर 10 फारेनहाईट आँका गया है) के परिणाम स्वरूप बारिश के तरीकों में बदलाव, हिमखण्डों और ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और वनस्पति तथा जन्तु जगत पर प्रभावों के रूप के सामने आ सकते हैं।
जब कार्बन डाई आक्साइड का वायुमंडल में आवरण बनता है तब सूर्य की किरणें धरती से वापस नहीं जा पाती है जितनी मात्रा में धरातल पर आती है जिसके कारण धरती तथा  सागर का तापमान निरंतर बढ़ने लगता है इस तापन को ही ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है भू उस्मैय तापमान का भी कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस है 

ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन के लिये सबसे अधिक जिम्मेदार ग्रीन हाउस गैस हैं। ग्रीन हाउस गैसें, वे गैसें होती हैं जो बाहर से मिल रही गर्मी या ऊष्मा को अपने अंदर सोख लेती हैं। ग्रीन हाउस गैसों का इस्तेमाल सामान्यतः अत्यधिक सर्द इलाकों में उन पौधों को गर्म रखने के लिये किया जाता है जो अत्यधिक सर्द मौसम में खराब हो जाते हैं। ऐसे में इन पौधों को काँच के एक बंद घर में रखा जाता है और काँच के घर में ग्रीन हाउस गैस भर दी जाती है। यह गैस सूरज से आने वाली किरणों की गर्मी सोख लेती है और पौधों को गर्म रखती है। ठीक यही प्रक्रिया पृथ्वी के साथ होती है। सूरज से आने वाली किरणों की गर्मी की कुछ मात्रा को पृथ्वी द्वारा सोख लिया जाता है। इस प्रक्रिया में हमारे पर्यावरण में फैली ग्रीन हाउस गैसों का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
 

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