जब औद्योगिक कल कारखानों से निकलने वाले सल्फ़र के ऑक्सायड तथा नाइट्रोजन के आक्सायड वोयु मैं मोजुद आदरता या जल वसप से क्रिया करते हैं तो वे सल्फ्यूरिक एसिड या नाइट्रिक अमल का निर्माण करते हैं तथा यह लालू वरसा के रूप में ज़मीन पर आते हैं इसी कारण एसे लाल बरसा या रक्त बरसा भी कहा जाता है इस समय सबसे अधिक अमल वरसा नार्वे सुइड़न उतरी कनाडा और ब्रिटेन के हिस्सों मैं होती है ।
अमल वरसा चेतावनी केंद्र नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में स्थापित किया गया है । अमल बरसा चेत्रय पूर्व चेतावनी केंद्र ब्रिटेन के मैनचेस्टर में स्थापित किया गया है ।
अम्लवर्षा में अम्ल दो प्रकार के वायु प्रदूषणों से आते हैं। So2 & Nox , ये प्रदूषक प्रारंभिक रुप से कारखानों की चिमनियों, बसों व स्वचालित वाहनों के जलाने से उत्सर्जित होकर वायुमंडल में मिल जाते है।
अम्ल वर्षा लगभग 70 प्रतिशत सल्फर के ऑक्साइड और 30 प्रतिशत नाइट्रोजन के ऑक्साइड के कारण होती है।
इस समस्या का समाधान एक ही प्रकार से संभव है। इसके लिये घातक वायु और पदार्थ के स्त्रोत जहाँ से ये प्रदूषक उत्पन्न हो रहे है, उनकों वहीं पर नियंत्रित करना।