सम्पूर्ण सौर मंडल की व्यवस्था में मात्र पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहाँ पर सर्वाधिक मात्रा में जल पाया जाता है । जल की उपस्थिति के कारण आंतरिछ से देखने पर पृथ्वी का रंग नीला दिखाई देता है ।ईसी कारण एसे ब्लू प्लैनेट या फिर ब्लू ग्रह भी कहा जाता है ।
जलमंडल से अर्थ जल की उस परत से है जो पृथ्वी की सतह पर महासागरों, झीलों, नदियों, तथा अन्य जलाशयों के रूप में फैली है। पृथ्वी की सतह के कुल क्षेत्रफल के लगभग ७१% भाग पर जल का विस्तार हैं, इसलिए पृथ्वी को जलीय ग्रह भी कहते हैं।जबकि २९ पर्सेंट चेत्र पर स्थल खंड का विस्तार है । यदि सम्पूर्ण टोस भू परिपाटी को पूर्णता समतल कर दिया जाता है तो वह सम्पूर्ण संसार ३६५० मीटर गहरे जल मैं डूब जाएगा ।
जल पृथ्वी पर पाया जाने वाला एक तरल पदार्थ है। जल बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है । जल पृथ्वी पर कई अलग-अलग रूपों में मिलता है।
जलमंडल से जुड़े तथ्य इस प्रकार हैं:- उत्तरी गोलार्द्ध का 60 फीसदी और दक्षिणी गोलार्द्ध का 80 फीसदी भाग महासागरों से ढका हैं।जल राशि का मात्र 2.5 फीसदी भाग ही स्वच्छ जल या मीठा जल है
जल मंडल में मुख्य रूप से महासागर शामिल हैं लेकिन तकनीकी रूप से इसमें पृथ्वी की संपूर्ण जलराशि शामिल है जिसमें आंतरिक समुद्र, झील, नदियां और २किमी. की गहराई तक पाया जाने वाला भूमिजल शामिल हैं। महासागरों की औसत गहराई ४किमी. है। विश्व के महासागरों का कुल आयतन लगभग १.४ बिलियन घन किमी. है। पृथ्वी पर उपस्थित कुल जल राशि का ९७.५फीसदी महासागरों के अंतर्गत आता है। जबकि बाकी २.५फीसदी ताजे जल के रूप में है। ताजे जल में भी लगभग ६८.७फीसदी जल बर्फ के रूप में है।समुद्री जल में औसत लवणता लगभग ३४.५प्रति हजार होती है अर्थात १किग्रा. जल में ३४.५ ग्राम लवण उपस्थित होता है। महासागर घुली हुई वातावरणीय गैसौं के भी बहुत बड़े भंडार होते हैं। यह गैसें समुद्री जीवों के जीवन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। समुद्री जल का विश्व के मौसम पर बहुत ही महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। महासागर विशाल ऊष्मा भंडार के रूप में कार्य करते हैं। महासागरीय तापमान वितरण में परिवर्तन से जलवायु पर बहुत बड़ा असर पड़ता है