ज्वार और भाँटा

महासागरीय जल मैं लहरों अवम धारावो के अतिरिक्त एक विशेष प्रकार की गतिविधि पाई जाती है  जिसके निश्चित समय अंतराल में 24 घंटों में दो बार ऊपर उठता है और नीचे गिरता है ऊपर उठने की घटना को ज्वार तथा नीचे गिरने की क्रिया को भाँटा कहा जाता है ।

एक ज्वार से दूसरे ज्वार के बीच का समय अंतराल 12 घंटा होता है चन्द्रमा सूर्य तथा पृथ्वी की पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण ही ज्वार तथा भाँटा की उत्पत्ति बार बार होती है । यद्यपि सूर्य का आकार काफ़ी बड़ा होने के कारण उसकी गुरूत्वाकर्षण शक्ति का सर्वाधिक पृथ्वी पर पड़ना स्वाभाविक है  ।

चंद्रमा सूर्य से २.६ लाख गुना छोटा है लेकिन सूर्य की तुलना में ३८०  गुना पृथ्वी के अधिक समीप है।फलतः चंद्रमा की ज्वार उत्पादन की क्षमता सूर्य की तुलना में २.१७ गुना अधिक है।

जब कभी सूर्य चंद्रमा तथा पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं उस समय तीनों की सम्मिलित शक्ति के कारण गृत्वयि शक्ति प्रभावशाली हो जाती है और वृहद ज्वार की उत्पत्ति होती है चंद्रमा की दूरी पृथ्वी से सबसे कम है इस कारण चंद्रमा के गृत्वकर्षड शक्ति का प्रभाव सागरों मैं अधिक पड़ता है ।ध्यान देने की बात यह है कि गुरुत्त्वाकर्षण की इस शक्ति में केवल पृथ्वी की शक्ति नहीं, बल्कि सूर्य और चन्द्रमा की शक्ति शामिल हैं । वैज्ञानिक आइज़क न्यूटन ने ज्वार-भाटा की क्रिया को समझाते हुए बताया था कि यह घटना चन्द्रमा तथा सूर्य के आकर्षण के कारण उत्पन्न होती है ।

ज्वार की उत्त्पत्ति चन्द्रमा और सूर्य के आकर्षण बल के कारण होती है । गुरुत्त्वाकर्षण के नियम के अनुसार पृथ्वी का वह भाग, जो चन्द्रमा के सामने पड़ता है, वहाँ आकर्षण बल काम करता है । इसलिये यहाँ उच्च ज्वार उत्पन्न होता है । जबकि, जो भाग चन्द्रमा से सबसे अधिक दूरी पर स्थित होता है वहाँ अपकेन्दीय बल होता हैं  इसलिए वहाँ निम्न ज्वार उत्पन्न होता है 

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