भारत में योग का प्रारम्भ सैन्धव काल से माना जाता है।
शैव पूजा का आदि रूप हड़प्पा सभ्यता से मिलता है।
हड़प्पा से एक ऐसा ताबूत मिला है जिसमें किसी विदेशी को दफनाया गया है।
सूर्यपूजा के प्रमाण सैन्धव सभ्यता से मिले ‘स्वास्तिक’ के प्रमाण से होता है-
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प्रमुख स्थल
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खोजकर्ता
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नदी
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स्थान
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हड़प्पा
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दयाराम साहनी
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रावी
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पंजाब (पाक)
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मोहनजोदड़ों
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राखालदास बनर्जी
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सिन्ध
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सिन्ध प्रान्त
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चाहुन्दड़ों
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एन0जी0 मजूमदार
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सिन्धु
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सिन्ध प्रान्त
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कालीबंगा
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अमलानन्द घोष
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सरस्वती एवं दृशद्वती
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राजस्थान
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लोथल
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एस0आर0 राव
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भोगवा नदी
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गुजरात
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धौलावीरा
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जे0पी0 जोशी
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गुजरात
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रोपड़
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यज्ञदत्त शर्मा
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सतलज नदी
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पंजाब (भारत)
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आलमगीरपुर
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भारत सेवक समाज
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हिण्डन
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मेरठ
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माण्डा
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जे0पी0 जोशी
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चिनाब नदी
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जम्मू
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सुरकोटदा
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जे0पी0 जोशी
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कच्छ गुजरात
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बालाथल (राजस्थान)-नवपाषाण काल से यह हड़प्पा सभ्यता का प्रतिनिधि केन्द्र था। यहाँ के उत्खनन से प्राप्त ताम्र मुद्राओं पर हाथी एवं चन्द्रमा की आकृति अंकित है।
गणेश्वर (राजस्थान) यहाँ से बड़ी संख्या में ताम्र औजार पाये गये है। संभवतः मोहनजोदड़ों और हड़प्पा को ताँबा से यही जाता था।
दक्षिण भारत के नवपाषाणकालीन किसानों द्वारा उगाई गयी सबसे पहली फसल रागी (मिलेट) थी।
-शेष अगले भाग में