प्राचीन भारतीय इतिहास-20

      ऋग्वेद का पहला मंत्र अग्नि की स्तुति से प्रारम्भ होता है। ऋग्वेद के 2 से 7 तक के मण्डल को वंश मण्डल कहा जाता है।

मण्डल       ऋषि

द्वितीय      ः    गृहत्समद

तृतीय        ः    विश्वामित्र (गायत्री मंत्र का उल्लेख)

चतुर्थ        ः    बामदेव अंगिरस (कृषि से सम्बन्धित क्रिया)

पंचम        ः    अत्रि

षष्ठ         ः    भारद्वाज

सप्तम्       ः    वशिष्ठ

अष्टम्       ः    कण्व, भृगु, अंगिरस

नौवा        ः    कण्व, भृगु, अंगिरस (सोम को समर्पित)

दशम        ः    त्रित, विमद, श्रद्धा कामायनी

ब्राह्मण ग्रन्थ      

ऋग्वेद के ब्राह्मण ग्रन्थ     ः    ऐतरेय, कौषतीकि

सामवेद            ः    जैमिनीय, ताण्ड्य

यजुर्वेद       ः    शतपथ, तैत्तिरीय

अथर्ववेद     ः    गोपथ ब्राह्मण

शतपथ ब्राह्मण-जल प्लावन कथा, पुनर्जन्म का सिद्धान्त, पुरूरवा उर्वशी आख्यान, रामकथा।

उपनिषद     ः   

ऋग्वेद       ः    ऐतरेय, कौषीतकी

सामवेद            ः    जैमिनीय, छान्दोग्य (उद्दालक आरूणि एवं श्वेतकेतु का बीच संवाद)

यजुर्वेद       ः    वृहदारण्यक (याज्ञवल्क्य गार्गी संवाद), कठोपनिषद (यम नचिकेता आख्यायन), ईशोपनिषद, श्वेताश्वर, मैत्रायणी

अथर्ववेद     ः    मुण्डक, माण्डूक्य, प्रश्न मुण्डकोपनिषद-सत्यमेव जयते एवं यज्ञों की टृटी नौकाओं के समान बताया गया।

कठ, मुण्डक, ईश और श्वेताश्वर उपनिषद पद (छन्द) में है।

प्रश्न तथा केन उपनिषद-गद्य और पद्य में है।

शेष सभी उपनिषद गद्य में है।

वेद                पुरोहित

ऋग्वेद       ः    होता (मंत्रों का उच्चारण)

सामवेद            ः    उदगाता (वैदिक मंत्रों का गायन)

यजुर्वेद       ः    अध्वर्यु (कर्मकाण्डों को सम्पन्न कराना)

अथर्ववेद     ः    ब्रह्मा (निरीक्षण कर्ता)

-शेष अगले भाग में

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