GPS (Global positioning system)
Tracking and navigation system
24 सैटेलाइट का समूह है जो तीन स्टेट में है (8*3=24) , प्रत्येक ऑर्बिट में 8-8 है, जो कि अलग-अलग स्थिति में होते हैं।
GPS सिस्टम USA के द्वारा निर्मित ट्रैकिंग एवं नेविगेशन सिस्टम है जिस में कुल 24 उपग्रह तीन कक्षाओं में उपस्थित हैं। प्रत्येक कक्षा में 8 उपग्रह हैं जो संपूर्ण पृथ्वी का अलग-अलग कोण से चित्र लेते हैं, इंचित्रों को कंप्यूटर से आपस में जोड़कर संपूर्ण पृथ्वी का मानचित्र प्राप्त कर लिया जाता है। इस प्रणाली की सटीकता पृथ्वी की सतह से 1m की ऊंचाई तक 10 वर्ग सेंटीमीटर
क्षेत्रफल तक है।
इस प्रणाली का प्रयोग सैन्य क्षेत्र में NATO संगठन एवं उनके सहयोगी देस कर सकते हैं, जबकि असैन्य प्रयोग सभी देशों के द्वारा किया जा सकता है।
गैलीलियो -EU (यूरोपियन यूनियन)
24 उपग्रह , GPS की तरह काम करेगा।
यह यूरोपीय यूनियन के द्वारा निर्मित Tracking & Navigation प्रणाली है,जो जीपीएस की तरह ही यूरोपीय देशों को सैन्य एवं असैन्य सेवा प्रदान करेगा।
Glosnoss- Russia
यह यह भी रूस द्वारा स्थापित किया जाने वाला ट्रैकिंग एवं नेविगेशन सिस्टम है, जिसके उपग्रह भू स्थैतिक कक्षाओं में स्थापित होंगे । यह रूस एवं उसके सहयोगी देशों को सैन्य सेवा एवं संपूर्ण विश्व के देशों के लिए असैन्य सेवा देने के लिए निर्मित किया गया है।
"GAGAN"
(GPS added geoaugment navigation system)
भारत के द्वारा स्थलीय क्षेत्रों में वायु परिवहन प्रणाली को मानवीय कार्य प्रणाली से होने वाली चूक को समाप्त करने के लिए निर्मित किया गया है। इसे 7 भूस्थैतिक उपग्रहों पर लगाया गया है, जिससे वायु परिवहन प्रणाली स्वायत्त एवम् मशीनी हो गई है।
IRNSS
(Indian resional navigation satellite system)
यह प्रणाली भारत के द्वारा क्षेत्रीय दिशा निर्देश को विकसित करने के लिए की गई है इस प्रणाली में कुल 7 उपग्रह हैं जो भूस्थैतिक कक्षाओं में उपस्थिति है।यह भारत के साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश , श्रीलंका, नेपाल, भूटान, लद्दाख, मालदीव, म्यांमार, मलेशिया का पश्चिमी भाग एवम् इंडोनेशिया का उत्तरी भाग भी कवर किया जाता है।
भारत इस प्रणाली का प्रयोग सैन्य एवम् असैन्य दोनों तरीकों से कर रहा है जबकि शेष पड़ोसी देश इसका नागरिक उपयोग ही कर सकते हैं। भारत में यह सेवा नवंबर 2015 से शुरू हो गई है।