इस वंश की स्थापना श्रीगुप्त ने किया था ।श्रीगुप्त ने महाराज की उपाधि धारण किया जो यह प्रदर्शित करता है कि यह किसी न किसी राजा के अधीन शासन करता था । श्रीगुप्त के बाद घटोत्कच गुप्त शासक हुआ इसने भी महाराज की उपाधि धारण किया था।
चंद्रगुप्त प्रथम ( 319 ई. - 334 ई. )-
इसने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र को बनाया ।इसे गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है । इसने महाराजाधिराज की उपाधि को धारण किया था। इसने लिच्छवी राजकुमारी 'कुमार देवी' से अपना विवाह किया था। इसके साम्राज्य का विस्तार आधुनिक बिहार तथा यूपी के भू भाग में था। इसने लिच्छवी राजकुमारी के विवाह के अवसर पर लिच्छवी प्रकार के सिक्के जारी किया जिसमें राजा रानी दोनों की आकृति अंकित है तथा राजा को सिंदूर दान करते हुए दिखाया गया है। इस सिक्के पर महाराजाधिराज की उपाधि मिलती है। चंद्रगुप्त प्रथम ने प्रयाग में एक सभा बुलाई और इसी सभा में अपने पुत्र को उत्तराधिकारी घोषित किया।