नमामी गंगा' हम कहां खड़े हैं?
पृष्ठभूमि
देश की 40% आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। 2014 में न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था, “अगर हम इसे साफ करने में सक्षम हो गए, तो यह देश की 40 फीसदी आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी। अतः गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा है”। इस सोच को कार्यान्वित करने के लिए सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का मई 2015 को शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए पर 2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया।
चर्चा में क्यों है
एनजीटी ने 19 जुलाई 2018 को कहा गंगा को साफ करने के लिए सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। सरकार ने दो साल में गंगा सफाई पर 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं, लेकिन गंभीर पर्यावरणीय मसले अभी भी बरकरार हैं। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस ए. के. गोयल की अध्यक्षता में जस्टिस जवाद रहीम और जस्टिस आर.एस राठौर की पीठ ने कहा कि अधिकारियों के दावे के बावजूद गंगा की सफाई के लिए धरातल पर पर्याप्त काम नहीं हुआ है। स्थिति में सुधार के लिए कार्यो की सतत निगरानी की जरूरत है। ट्रिब्यूनल ने गंगा प्रदूषण की जमीनी हकीकत के बारे में आम लोगों के बीच एक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि लोग संबंधित अधिकारियों के ईमेल के जरिये भी अपनी राय दे सकते हैं।