संसद देश के नागरिकों के लिए समान कानून बनाती है ताकि देश की जनता एक सुखमय जीवन व्यतीत कर सकें। थोड़ा सा प्रकाश हम देश की संसद के बारे में जानना चाहेंगे-संसद के तीन अंग होते हैं राज्यसभा लोकसभा एवं राष्ट्रपति , जिसमें राज्यसभा कभी भी भंग नहीं होती परंतु लोकसभा का एक निश्चित कार्यकाल होता है।
लोकसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रुप से जनता के द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है। जिनका कार्यकाल 5 वर्ष होता है जब तक लोकसभा में बहुमत प्राप्त है तब तक सरकार सत्ता में रहेगी, और जब विपक्ष को लगता है कि सत्ता में सरकार का अब बहुमत नहीं रह गया है तो विपक्ष का नेता अविश्वास प्रस्ताव लाता है, ध्यान रहे अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है।
आइए अब देश की जनता के खर्चे से चल रही संसद के खर्चे के बारे में जानते हैं-
15वीं लोकसभा का हाल देखने के बाद लोगों को उम्मीद थी की 16वीं लोकसभा में हालात सुधरेंगे शायद संसद में हंगामे और संसद ठप होने का दौर कम होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और संसद में कामकाज के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
संसद में 1 मिनट की कार्यवाही का खर्च ₹250000 पड़ता है यानी 1 घंटे का खर्च डेढ़ करोड़ रुपए तक आता है । आमतौर पर राज्यसभा की कार्यवाही 1 दिन में 5 घंटे ही चलती है यानी एक दिन का लगभग 7: 30 करोड़ जबकि लोकसभा की कार्यवाही 1 दिन में 8 से 11 घंटे चलती है। अगर लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर रोजाना घंटे काम हो तो सोमवार से शुक्रवार तक का खर्च करीब 115 करोड़ होता है। ऐसे में 2010 से 2014 के बीच संसद के 900 घंटे बर्बाद हुए तो सोचिए कितना पैसा बर्बाद हुआ होगा। यह सारा पैसा आखिरकार जनता का ही तो है जो कर के रूप में अदा करता है।
16वी लोकसभा में अब तक नुकसान
- पहले सत्र में हंगामे की वजह से 16 मिनट बर्बाद हुए यानी 40 साल लाख का नुकसान
- दूसरे सत्र में 13 घंटे 51 मिनट , यानी 20 करोड़ सात लाख का नुकसान
- तीसरे सत्र में 3 घंटे 28 मिनट काम नहीं हुआ है यानी 5 करोड़ 20 लाख का नुकसान
- चौथे सत्र में 7 घंटे 4 मिनट बर्बाद हुए यानी 10 करोड़ 60 लाख रुपए का नुकसान
- पांचवें सत्र में 119 घंटे बर्बाद हुए यानी 178 करोड़ 50 लाख का नुकसान
- छठे और मौजूदा सत्र में भी रुक रुक कर हो रहा काम
देश की जनता का पैसा यूं ही बर्बादी की भेंट चढ़ जाता है।
फिर मिलेंगे एक नए विचार के साथ तब तक धन्यवाद.....