घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005
जाने इस अधिनियम को
- घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 भारत की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है, जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाना है। यह 26 अक्टूबर 2006 को लागू हुआ था।
घरेलू हिंसा क्या है?
- शारीरिक दुर्व्यवहार अर्थात शारीरिक पीड़ा, अपहानि या जीवन या अंग या स्वास्थ्य को खतरा या लैगिंग दुर्व्यवहार अर्थात महिला की गरिमा का उल्लंघन, अपमान या तिरस्कार करना या अतिक्रमण करना या मौखिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार अर्थात अपमान, उपहास, गाली देना या आर्थिक दुर्व्यवहार अर्थात आर्थिक या वित्तीय संसाधनों, जिसकी वह हकदार है, से वंचित करना,मानसिक रूप से परेशान करना ये सभी घरेलू हिंसा कहलाते हैं।
क्यों है चर्चा में
- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा है कि घरेलू हिंसा कानून को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए और इसके साथ ही उनकी जानकारी सार्वजनिक रूप होनी चाहिए।
- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 13 जुलाई को बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को कहा है कि परिवार में घरेलू हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं को तत्काल सुरक्षा और राहत प्रदान करने के लिए ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (पीडब्ल्यूडीवीए), 2005’ के प्रावधानों को प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अधिनियम को लागू करने के लिए संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए और इसके साथ ही उनके विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि कोई भी पीड़ित महिला उनसे संपर्क कर सके।
- उन्होंने कहा, ”यह जानकारी मेरे संज्ञान में आई है कि ज्यादातर राज्यों में अन्य विभागों के अधिकारियों को ही यह जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंप दी गई है।