आटविक राज्य -
यह राज उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से लेकर मध्य प्रदेश के जबलपुर क्षेत्र में फैला था। यह मुख्यतः जंगली इलाकों में फैला था। इसका वर्णन प्रयाग प्रशस्ति की 21वीं पंक्ति में मिलता है। समुद्रगुप्त ने इन राज्यों के साथ परिचारिकृत की नीति अपनाई जिसका अर्थ था उन्हें सेवक या दास बना कर छोड़ देना।
सीमावर्ती राज्यों का विजय -
प्रयाग प्रशस्ति की 22वीं पंक्ति में सीमावर्ती राज्य का उल्लेख मिलता है। सीमावर्ती राज्य के बारे में कहा गया है कि यह समुद्रगुप्त को सभी प्रकार के कर देते थे तथा उसकी आज्ञाओं को मानने के लिए उसकी राजधानी में उपस्थित रहते थे। यह सीमावर्ती राज्य उत्तर पूर्व की सीमा में थे। इनकी संख्या 5 है।
1- समतट (पूर्वी बंगाली या आधुनिक बांग्लादेश)
2- डवाक (असम के नवागांव जिला से पहचान किया गया है।)
3- कामरूप (इसकी पहचान वर्तमान असम के किया गया है।)
4- कुर्तुपुर (इसकी पहचान जालंधर में स्थित करतारपुर से किया गया है।)
5- नेपाल